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Wednesday, February 13, 2019

भगवन श्री कृष्णा (Shri Krishna) के जन्म की कथा ।


श्री कृष्ण जी का जन्म  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात में हुआ था .रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव जी  की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से जन्माष्टमी(janmashtami) के रूप में मनाई जाती है।

क्यों भगवान श्रीकृष्ण जी का जन्म की कथा अद्भुत है ?

‘द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था।
एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई- ‘हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।’ यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ।
तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- ‘मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है?’ कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया।
वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था।
उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ ‘माया’ थी।

जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े। तब भगवान ने उनसे कहा- ‘अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं।

तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है। फिर भी तुम चिंता न करो। जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे, कारागृह के फाटक अपने आप खुल जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी।’

उसी समय वसुदेव नवजात शिशु-रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने नवजात शिशु को यशोदा के साथ सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा आ गए। कारागृह के फाटक पूर्ववत बंद हो गए।
अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी के  बच्चे का जन्म हुआ है। उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- ‘अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा।

क्यों मनाते है जन्माष्टमी(janmashtami) ?
इस दिन श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था जो की बहुत ही अद्भुत था। इनका जन्म काली अँधेरी रात में हुआ लेकिन सभी भक्तो के जीवन में प्रकाश ही प्रकाश फ़ैल गया। 
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Tuesday, January 29, 2019

जानिये राधे कृष्णा ने क्यों नहीं की थी शादी ।



राधा-कृष्ण के प्रेम की कहानी किसी से छुपी नहीं है. उनके अमर प्रेम का उदाहरण आज भी लोग देते हैं. कृष्ण की राधा के साथ लीलाएं और राधा की कृष्ण के लिए दीवानगी किसी से छुपी नहीं है.
शायद राधा के कृष्ण के लिए प्रेम की वजह से ही राधा का नाम कृष्ण से पहले लिया जाता है. लेकिन इसके बावजूद श्रीकृष्ण ने राधा से शादी नहीं की. लेकिन क्या आप इसकी वजह जानते हैं?
पुुराणों में इसकी वजह बताई गई है. लेकिन इसके कई कारण बताए गए हैं, आज हम आपको बता रहें हैं कि आखिर राधा-कृष्ण ने शादी क्यों नहीं की?

पौराणिक कथाओं की माने तो कृष्ण राधा के प्रेमी होने के साथ-साथ एक कुशल कूटनीतिज्ञ भी थे. लेकिन राधा तो केवल कृष्ण की ही दीवानी थी. ऐसा माना जाता है कि राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी बचपन से ही शुरू हो गई थी.
आपको बता दें कि राधा उम्र में कृष्ण से बड़ी थीं, लेकिन इसके बाद भी उनके मन में कृष्ण के लिए प्रेम पैदा हुआ.
पुराणों के अनुसार राधा को माता लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है. ये बात तो सभी जानते हैं कि कृष्ण भगवान विष्णु जी के ही अवतार थे. हालांकि लक्ष्मी जी ने इस बात का प्रण लिया था कि वो हर अवतार में विष्णु जी की पत्नी बनेंगी.
भगवान विष्णु का उनके अलावा और किसी से विवाह नहीं होगा. अब इस बात को माने तो इस बात की पूरी संभावना हो सकती है कि राधा के रूप में लक्ष्मी जी का विवाह कृष्ण रूप में भगवान विष्णु से हुआ होगा.
गर्ग संहिता की माने तो कृष्ण जब बचपन में नंद बाबा की गोद में खेल रहे थे. तभी उन्हें एक अद्भुत शक्ति का अबसास हुआ जो कोई नहीं बल्कि राधा थीं. वो तुरंत ही बाल अवस्था को छोड़ कर यौवनावस्था में आ गए.
ऐसा माना जाता है कि इसी समय ब्रह्मा जी ने राधा-कृष्ण का विवाह कराया था. विवाह होने के बाद सब कुछ सामान्य हो गया. विवाह के बाद ही ब्रह्मा जी और राधा जी भी अंतरध्यान हो गए और कृष्ण भी अपनी बाल अवस्था में वापस आ गए|


कुछ पौराणिक कथाओं की माना तो राधा और रुक्मणी एक ही थीं. जिस तरह से राधा कृष्ण की दीवानी थीं ठीक वैसे ही रुक्मणी भी कृष्ण को पति के रूप में पाने के सपने देखती थीं. लेकिन रुक्मणी के भाई ने उनका संबंध कहीं और ही कर दिया था.
ये बात जानकर रुक्मणी ने अपने भाई से कहा कि अगर उनका विवाह कृष्ण के अलावा किसी से हुआ तो वो अपने प्राण त्याग देंगी. लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि इस घटना से पहले कृष्ण, रुक्मणी को जानते ही नहीं थे, लेकिन इसके बाद भी वो रुक्मणी से विवाह करने चले गए.
ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण के ऐसा करने के पीछे का कारण ये था कि असल में राधा और रुक्मणी एक ही थीं. पौराणिक कथाओं के अनुसार राधा को रुक्मणी का आध्यात्मिक अवतार भी माना जाता है. अब इन कथाओं की माने तो राधा-कृष्ण का विवाह सीधे तौर पर तो नहीं हुआ लेकिन दोनों जीवन भर एक-दूसरे से प्रेम करते रहे|

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Tuesday, January 1, 2019

श्री कृष्ण से जुडी कुछ रहस्यमयी बातें |


दोस्तों केवल भारत में ही नहीं परंतु विश्व भर में भगवान श्री कृष्ण की लीला प्रचलित है श्री हरी भगवान् विष्णु के अवतार कृष्ण के बारे में जो लोग जितना जानते है उनके मन उनके बारे में और ज्यादा जानने की इच्छा जगती है आप में से बहुत सारे लोग भगवान श्रीकृष्ण की कथा जानते होंगे परंतु आज हम भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी कुछ ऐसे रहस्य के बारे में बता रहे है जो शायद आप नहीं जानते होंगे |

श्री कृष्ण का रंग

पुराण के अनुसार कुछ लोग कृष्ण जी की त्वचा का रंग काला और ज्यादातर लोग शाम रंग का मानते हैं श्याम रंग अर्थात कुछ कुछ काला और कुछ कुछ नीला मतलब कि काले जैसा नीला जैसा कि सूर्यास्त के बाद जब दिन अस्त होने वाला होता है तो आसमान का रंग काले जैसा नीला हो जाता है जनश्रुति अनुसार उनका रंग ना तो काला और ना ही नीला था उनका रंग काला मिश्रित नीला भी नहीं था असल में उनकी त्वचा का रंग मेघश्याम था यानी एक बादल के समान अर्थात काला नीला और सफेद का मिश्रित रंग था |

कृष्ण जी के गंध 

माना जाता है कि श्री कृष्ण जी के शरीर से एक मादक गंध निकलती रहती थी इस इस गंध को वह अपने गुप्त अभियानों में छुपाने का उपक्रम करते थे चौंकाने वाली बात यह है कि यही खूबी द्रोपदी में भी थी द्रौपदी के शरीर से से भी सुगंध निकलते रहती थी लोगों का मानना है कि यह खूबी के कारण ही श्री कृष्ण जी ने द्रौपदी को अपनी बहन माना था माना जाता है कि श्री कृष्ण के शरीर से निकलने वाली गंध गोपीका चंदन और कुछ कुछ रातरानी की सुगंध से मिलती-जुलती थी कुछ लोग उसे अष्टगंध भी कहते हैं |

श्रीकृष्ण की मृत्यु 

श्री कृष्ण का बचपन गोकुल वृंदावन बरसाना आदि जगहों पर बीता था कंस का वध करने के बाद उन्होंने अपने माता पिता को कंस के कारागार से मुक्त कराया और फिर जनता के अनुरोध से मथुरा का राजभर संभाला उसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने द्वारिका में अपना निवास स्थान बनाया और यही नहीं उन्होंने महाभारत युद्ध में भी भाग लिया महाभारत के युद्ध के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण कौरवों की माता गांधारी के पास गए तो गांधारी ने अपने सभी पुत्रों की मृत्यु से क्रोधित होकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने पुत्रों की मृत्यु का कारण बताते हुए उन को श्राप दे दिया की तुम्हारे कारण जिस तरह मेरे पुत्रों का नाश हुआ है उसी प्रकार तुम्हारे वंश का भी आपस में एक दूसरे को मारकर नाश हो जाएगा उसी श्राप के कारण मदिरापान के नशे में श्री कृष्ण के वंशज आपस में लड़ने लगे और एक दूसरे को मारने लगे जिसके कारण भगवान श्री कृष्ण और उनके साथ कुछ ही लोग जीवित बचे थे एक दिन इसी प्रभाव क्षेत्र के वन में श्री कृष्ण एक पीपल के वृक्ष के नीचे लेटे हुए थे तभी जरा नामक एक बहेलिया ने भूलवश भगवान श्रीकृष्ण को हिरन समझकर विष युक्त बाण चला दिया वाण से भगवान भगवान श्री कृष्ण के पैरों के तलवे में जाकर लगा और भगवान श्रीकृष्ण ने इसी को बहाना बनाकर अपना शरीर का त्याग कर दिया |

मार्शल आर्ट के जन्मदाता भगवान श्री कृष्ण

भारतीय परंपरा और जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी ने ही मार्शल आर्ट का आविष्कार किया था दरअसल पहले इसे अलारी प्लाटो कहा जाता था इस विधि के मदद से ही भगवान श्रीकृष्ण ने चारु ओर और अन्य कई दैत्यों का वध किया था उनकी उम्र कुछ 16 वर्ष की ही थी उन्होंने मथुरा के राजा का सर को अपने हथेली के प्रहार से ही काट दिया था दोस्तों जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने मार्शल आर्ट का आविष्कार भरत क्षेत्र के वनों में किया था डांडिया रास उसी का एक नित्य रूप है मार्शल आर्ट का जन्मदाता भगवान श्रीकृष्ण को ही माना जाता है हालांकि इसके बाद इस विधि को अगस्त मुनि ने प्रचारित किया था इस कारण भी नारायणी सेना भारत के सबसे भयंकर सेना और प्रलयकारी सेना बन गई थी भगवान श्रीकृष्ण नहीं मार्शल आर्ट की नींव रखी थी जो बाद में बौद्ध धर्म से होते हुए मार्शल आर्ट के नाम से प्रसिद्धि हुआ बौद्ध धर्म के कारण ही यह विद्या चीन-जापान आदि बौद्ध क्षेत्रों में खूब फली-फूली आज भी यह विद्या केरल और कर्नाटक में प्रचलित है |

श्री कृष्ण की पत्नियां 

भगवान श्री कृष्ण के बारे में कहा जाता है कि उनकी 16100 पत्नियां थी लेकिन यह तथ्य गलत है भगवान श्रीकृष्ण की मात्र 8 पत्नियां थी श्री कृष्ण जी की जींस 16000 पत्नियों के बारे में कहा जाता है दरअसल वे सभी नरकासुर के यहां बंधक बनाई हुई महिलाएं थी जिनको भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त करवाया था वो सभी महिलाएं किसी की मां थी किसी की बहन और किसी की बीवी थी जिनको नरकासुर अपहरण करके अपने यहाँ बंदी बनाए हुए था सभी महिलाओं की इज्जत बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने उन् सभी को अपनी पत्नियां होने का दर्जा दिया था |

तो दोस्तों यह था भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी कुछ रहस्यमई बातें  |

                                                                                                                            Source: https://bit.ly/2ToLv9g

Wednesday, December 26, 2018

बाल श्री कृष्णा की रोचक कथा |

          बाल श्री कृष्णा की रोचक कथा

श्री कृष्णा जन्म : बाल कृष्णा का जन्म जन्माष्टमी के शुभ पर्व से जाना जाता है | श्री कृष्णा भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे | जब कृष्णा का जन्म हुआ तब जेल के सभी सनतरी माया से सो गए | जेल के दरवाजे स्वत: ही खुल गये | उस वक़्त भारी बारिश हो रही थी | यमुना नदी में उफान मचा हुआ था | एसे में वासुदेव बाल क्रिशन को टोकरी में रखकर जेल से बहार निकल गए | पर उनको गोकुल जाने के लिए यमुना नदी को पार करना था वो काफी मुश्किल लग रहा था |और तभी जाने कोई चमत्कार हुआ की अचानक ही यमुना नदी के जल दो हिस्सों में बंट गए और अपने आप रास्ता बन गया | वासुदेव कृष्णा को अपने मित्र नंदजी के वहां ले गए जहाँ पे नन्द की पत्नी यशोदा को भी एक संतान ( कन्या ) हुई थी | वासुदेव ने  कृष्णा को  वहीँ सुला दिया और उस कन्या को लेकर जेल में आ गए | कृष्णा को जन्म भले देवकी माता ने दिया था पर उनकी पालक माता तो यशोदाजी थी |

पूतना का वध : जब कृष्णा के मामा कंस को पता चल जाता है की छल से देवकी और वासुदेव ने अपने पुत्र को कहीं भेज दिया है तो वो चारों और अपने अनुचरो को सूचित करता है की कृष्णा जन्म के समय पे जितने भी बालकों का जन्म हुआ है उनका वध कर दिया जाये | कंस के अनुचरो को पता चल जाता है की कृष्णा गोकुल मैं है यमुना के उसपार | और श्री कृष्णा का मामा कंस अपने राक्षसों को भेजकर उसको मारने का प्रयास करता है | पर उन सब को बाल कृष्णा ने मार गिराया | पूतना का आतंक उस समय बहुत ज्यादा था | और कंस ने पूतना को कृष्णा को मारने के लिए भेजा पर पूतना को वोह नहीं पता था की बाल कृष्णा भगवान विष्णु का रूप थे | और श्री कृष्णा ने पूतना का वध किया और सभी मनुष्यों को उनके आतंक से मुक्त किया |

बाल कृष्णा की लीलाएँ :  
(1) बाल कृष्णा को माखन बहुत ज्यादा पसंद था | इसीलिए वह हररोज सब गोपियों के घर जाकर माखन चुराके भी खाते थे | 

(2) एक दिन बाल कृष्णा ने मिटटी खाई | और माता यशोदा मिटटी देखने के लिए उनके मुख को खोलती है तो माता यशोदा को बाल कृष्णा के मुख में ब्रह्मांड और तीनों लोको का दर्शन होता है |

(3) श्री कृष्णा को रास लीला बहुत पसंद थी | इसीलिए श्री कृष्णा अपने मित्रों के साथ मिल कर हर पर्व पे रासलीला का आयोजन करते थे |

(4) कदम्ब वन में उन्होंने बलराम के साथ मिलकर कालिया नाग का वध किया था |

(5) बाल कृष्णा की शरारत बढ़ जाने से माता यशोदा उनको एक पेड़ पर रस्सी से बांध कर रखती थी | 


जन्माष्टमी के शुभ पर्व पर भारत में दहीं हांड़ी का आयोजन होता है | जिसको गोविन्दा बने छोटे बच्चे एक पिरामिड बनाकर फोड़ते है | हर मंदिर में हिंडोडा दर्शन का आयोजन किया जाता है | और जन्माष्टमी के रात 12 बजे श्री कृष्णा का जन्म बड़े धामधूम से मनाया जाता है |  

                                                                                                                                                               Source : https://bit.ly/2V97wKO

Tuesday, December 18, 2018

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पौराणिक कथा

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। 
 'द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था। 
एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई- 'हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।' यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- 'मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। 
कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया। 

वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। 

उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ 'माया' थी। जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े। तब भगवान ने उनसे कहा- 'अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है। फिर भी तुम चिंता न करो। जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे, कारागृह के फाटक अपने आप खुल जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी।'
उसी समय वसुदेव नवजात शिशु-रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने नवजात शिशु को यशोदा के साथ सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा आ गए। कारागृह के फाटक पूर्ववत बंद हो गए। 
अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है। 

उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- 'अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे  पापों का दंड देगा।' यह है कृष्ण जन्म की कथा। 

                                                                                        Source : https://bit.ly/2SZPVTK

Saturday, August 16, 2014

Celebrating Janmashtami with the prettiest French girl in Paris!



Krishna
 A few months after the Gauda Vaishnavas built their temple (temporary) in Paris in the 1970s, Srila Prabhupada the founder Acharya of ISKCON, visited the city where he was interviewed by reporters. Krishna is known as Paris-eswara at the temple, which is called Sri Sri Radha-Pariseswara temple.

At the interview, Prabhupada had remarked, "Radharani has come to France as the most beautiful French girl. Because in the whole world the girls with the most beautiful faces are the French girls."

Today, as we celebrate Janmashtami, Parisian Vaishnavas will also be honoring the arrival of Nandlala, the divine flute player of Vrindavan, who incarnated in the world of mortals drawn by the love of his devotees. Devotees continued to steadfastly look for a permanent temple site for the deites, which happened in 2007. 

All glories to Shrimati Radharani of Paris! All glories to Lord Krishna! All glories to Vaishnavas!

Watch a video of a Legendary Beatles singer singing My Sweet Lord, a song to Lord Krishna on this linkhttps://www.youtube.com/watch?v=Pj1urvxkdNw

Janmashtami

- Mamtamai Shri Radhe Guru Maa Charitable Trust

Note

To know more about Guru Maa’s teachings you may follow her on her account on Twitter and Facebook or log on to www.radhemaa.com. These social pages are handled by her devoted sevadars. To experience her divine grace, Bhakti Sandhyas and Shri Radhe Guru Maa Ji’s darshans are conducted every 15 days at Shri Radhe Maa Bhavan in Borivali, Mumbai. The darshans are free and open to everyone.

One may also volunteer to Mamtamai Shri Radhe Guru Maa’s ongoing social initiatives that include book donation drives, blood donation drives, heart checkup campaigns and financial support for various surgical procedures. Contact Shri Radhe Maa’s sevadar on +91 98200 82849 or email on admin@radhemaa.com to participate in these charitable activities.

(Photo Courtesy - google.com)

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