Tuesday, November 20, 2018

सेब खाने के 10 बेहतरीन फायदे |



अंग्रेजी में कहा गया है, "एन एपल ए डे", कीप्स द डॉक्टर अवे" अर्थात् एक सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ।
यह है सेब खाने के १० फायदे जिसे जान कर चौक जाएंगे आप ।

1. एनीमिया भगाए 
 ये एनेमिया जैसी बीमारी का इलाज भी करता है क्योंकी सेब में आयरन बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है। अगर आप दिन में 2 से 3 सेब खाते है तो यह पूरे दिन की आयरन की कमी को पूरा करता है।

2. कैंसर के खतरे को कम करे
 सेब में मौजूद क्वरसिटिन व्यक्ति की कोशिकओं को नुकसान पहुचने से बचाता है। इससे कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

3. मधुमहे से बचाए
 सेब में पाए जाने वाला पेक्टिन जो की ग्लाक्ट्रोनिक एसिड की कमी शरीर में पूरी करता है और इन्सुलिन के उपयोग को कम करता है।

4. पाचन में सहायक 
सेब में बहुत अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो की पाचन में मदद करता है। और अगर सेब को उसके छिलके के साथ खाया जाये तो इससे कब्ज़ भी ठीक हो जाता है।

5. कोलेस्ट्रॉल को कम करे
 सेब में घुलन शील फाइबर पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल को कम करता है।

6. वजन को नियंत्रित करे
 कई स्वास्थ्य समस्याओं की वजह मोटापा माना जाता है। जैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी बिमारियां ज्यादा वजन के कारण ही होती है। सेब में फाइबर उच्च इस्तर में पाया जाता है जो वजन कम करने में मदद करता है।

7. इम्यून सिस्टम को अच्छा रखे 
लाल सेब में क्वरसिटिन नमक एंटीओक्सिडेंट पाया जाता है। हाल के अध्ययनों में पाया गया है की क्वरसिटिन आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

8. लीवर को मजबूत करे 
हम अपनी रोज़मरा की ज़िन्दगी में थोड़ा-बहुत ज़हरीला खाना खाते है। जिससे हमारा लीवर शरीर से साफ करता है और लीवर को मजबूत रखने के लिए रोज़ एक सेब खाए क्योंकी इसमें एंटीओक्सिडेंट पाए जाते है।


9. दस्त और कब्ज को मारे 
सेब फाइबर का भंडार माना जाता है। ये आपको कब्ज़ या दस्त जो छोटे बच्चो में हो जाता है उससे बचता है।

10. दातों को स्वास्थ्य बनाए
 सेब में फाइबर होता है जिसे आपके दांत अच्छे रहते है। इसमें एंटीवायरल प्रोपेर्तिएस पाई जाती है जो बैक्टीरिया और वायरस को दूर रखता है। और आपके मुंह में थूक की मात्रा को को भी बढ़ाता है।


                                                                                                                                                                         Source: https://bit.ly/2OTU8FY



Saturday, November 17, 2018

जानें कैसे करें बच्चों की सही परवरिश!


किसी बच्चे के लिए उसके माता-पिता ही उसके पहले टीचर होते हैं, जिनसे वो बोलना, चलना और व्यवहार की अन्य आदतें सीखता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हर क्षेत्र में अव्वल रहे, तो कुछ आदर्श आपको खुद भी प्रस्तुत करने होंगे।

अक्सर पैरेंट्स बच्चों पर जोर-जबरदस्ती कर उन्हें आदर्श और शिष्टाचार की बातें सिखाने की कोशिश करते हैं, पर क्या आपने कभी गौर किया है कि बच्चे व्यवहार संबंधी सारी बातें आपसे ही सीखते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आपका बच्चा कल को आपके ही नक्शेकदम पर चलेगा। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आपकी सुने और उसमें अच्छे गुण आएं, तो आपको उसके सामने खुद की एक मिसाल पेश करनी होगी। बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका अपना घर होता है, जहां पैरेंट्स उसके टीचर होते हैं। सामाजिकता, व्यवहारिकता और नैतिकता की बातें बच्चे घर से ही सीखते हैं। बच्चों में यदि आप आदर्श मूल्य स्थापित करना चाहते हैं, तो उसकी शुरुआत खुद से ही करें।

मीठा बोलें, अच्छा बोलें!

बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं कर पाते, ऐसे में पैरेंट्स होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उनको सही और गलत में फर्क समझाएं। अकसर देखा गया है कि बच्चे अपने अभिभावक या परिवार की शह पर ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यही नहीं, यदि आप भी अपनी बोलचाल में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो संभव है कि बच्चा भी आपकी नकल करे। इसलिए बच्चों से कभी भी कड़वी भाषा न बोलें। साधारण बातचीत में भी अच्छे शब्दों का ही इस्तेमाल करें। इसी तरह आप उनको सही तरीके से कम्युनिकेट करना भी सिखा सकते हैं, मगर इसके लिए आपको एक अच्छा श्रोता बनना पड़ेगा। इसलिए आप जब भी अपने बच्चे से बात करें, हमेशा आंखों से आंखें मिलाकर बात करें। इससे बच्चे को लगेगा कि आप उसमें रुचि ले रहे हैं। फलस्वरूप उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वो अपनी हर बात आपसे शेयर करेगा।

शिष्टाचार भी है जरूरी!

अच्छी आदतें और व्यवहार की कुछ बातें बच्चे बिना सिखाए ही आपसे सीख लेते हैं। जैसे रोजमर्रा की जिंदगी में यदि आप उनके साथ व्यवहार करते हुए सम्मान व आदर सूचक संबोधन करेंगे, तो वे भी प्रतिक्रिया देंगे। इसलिए ‘कृपया’ और ‘धन्यवाद’ जैसे शब्द हमेशा अपने बच्चों के सामने बोलें। आपकी इस तरह की प्रतिक्रिया निश्चित रूप से बच्चे को प्रभावित करेगी और इस तरह आप अपने बच्चे के लिए रोल मॉडल बन जाएंगे।

कहीं अंतर्मुखी ना बना दे रिश्तों का सीमित दायरा!

संयुक्त परिवार का आधार धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और लोग अब अपने आप में सिमटने लगे हैं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े बच्चे आत्मकेंद्रित हो रहे हैं। इसके लिए वे दोषी भी नहीं हैं, क्योंकि आपने उन्हें माहौल ही ऐसा दिया है। वे दादा-दादी, नाना-नानी की कहानियों से महरूम तो हो ही रहे हैं, साथ ही साथ वे अन्य रिश्तों से भी दूर हो रहे हैं। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो बच्चे पूरी तरह से पढ़ाई में समर्पित हो जाते हैं, लेकिन परिवार और समाज से दूर होते जाते हैं, उनका आईक्यू तो ठीक रहता है, पर संपूर्ण विकास नहीं हो पाता।

बच्चों को अगर आप सही रूप से पारिवारिक स्तर पर विकसित करना चाहते हैं, तो आपको परिवार के अन्य सदस्यों से मधुर रिश्ता बनाना होगा। पर्व-त्यौहार के मौके पर उनसे मिलें। बच्चों को भी उनसे घुलने मिलने दें। झगड़ा होने पर बच्चे को इधर से उधर संदेश पहुंचाने का माध्यम न बनाएं। ऐसी स्थिति में उसके लिए सही-गलत तय करना मुश्किल हो जाता है। यह चीज उसके अंदर असुरक्षा की भावना भर देती है, जिससे उसका व्यक्तित्व प्रभावित होता है। इसलिए बच्चे को अपनी लड़ाई से दूर ही रखें।

बच्चों को आरंभ से ही व्यवहार संबंधी जरूरी बातें सिखाएं और खुद भी ऐसा करें। बड़ों का आदर करना, छोटों को प्यार देना, आपस में बांटने की भावना, ये सारी बातें बच्चा आपसे ही नकल करता है। आपका बच्चा उचित व्यवहार सीखे, इसके लिए आपको खुद भी व्यवहार कुशल बनना पड़ेगा। इससे न सिर्फ पारिवारिक, बल्कि सामाजिक भावना को भी आप आपने बच्चे में विकसित कर पाएंगे।

हेल्दी होगा फूड, तो बच्चा रहेगा कूल!

अकसर पेरेंट्स की शिकायत होती है कि उनका बच्चा कुछ खाता ही नहीं। चलो मान लेते हैं कि कुछ बच्चे ऐसे होते हैं, पर प्रयास तो आपको करना ही पड़ेगा। बच्चों में खाने की अच्छी आदत विकसित करना चाहते हैं, तो उनमें खाने की नकल करने की प्रवृत्ति डालें। हेल्दी फूड और उससे होने वाले लाभ को कहानियों के माध्यम से बताएं। खाने का प्रेजेंटेशन बेहतर रखें। जो भी रेसिपी हो, उनके साथ टेबल पर बैठ कर खाएं। खाने के दौरान उन्हें टीवी बिलकुल न देखने दें। खाने के लिए उनके पीछे-पीछे भागें भी नहीं।

सिखाएं बच्चे को साफ-सफाई की अच्छी बातें!

सफाई की आदत अत्यंत महत्वपूर्ण आदत है, जो बच्चों को स्वच्छ, निरोग और प्रसन्नचित्त रखती है। समय से उठना, शौचालय जाना, दांतों की सफाई करना, नित्य स्नान करना, अपने शरीर व आसपास के वातावरण को साफ रखना, व्यायाम करना आदि अच्छी आदतें हैं, जो बच्चों में डालनी अत्यंत आवश्यक हैं और ऐसा माहौल आपको ही तैयार करना होगा। अगर आप इन सारी आदतों पर ध्यान देंगे, तो आपका बच्चा भी इनके लिए प्रेरित होगा। हर काम के लिए एक उचित रूटीन बनाएं और कड़ाई से उसको फॉलो करें।क्यूंकि ज्यादा सख्ती बच्चे को उद्दंड भी बना सकती है, इसलिए कभी-कभी उसको छूट देने की गुंजाइश भी रखें।

कैसा है स्कूल में आपका बच्चा!

बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत नर्सरी से होती है, जहां वे अपने पैरेंट्स से दूर टीचर से संबंध बनाते हैं। चूंकि टीचर के साथ उनका संबंध दोस्ताना होता है, आप बच्चों के सामने किसी शिक्षक के बारे में अपमानजनक भाषा में बात न करें। आपको यह समझना चाहिए कि एक शिक्षक आपके बच्चे को अच्छी बातें ही सिखाते हैं। इसलिए कभी भी शिक्षक की क्षमता पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाना चाहिए। शिक्षक के प्रति सद्व्यवहार को विकसित करें और उनके प्रति अपनी शुभकामनाएं पेश करें। अगर बच्चे में शिक्षक के प्रति सम्मान की भावना होगी, तो ही वह टीचर की सुनेगा।

जरूरी है बच्चे के साथ ‘क्वालिटी टाइम’ गुजारना!

बच्चों के साथ समय बिताएं। चाहे आप उन्हें पूरा समय नहीं दे पाते हों, पर जितना भी वक्त दें, पूरे अटेंशन के साथ उनके साथ रहें। इससे उनका पारिवारिक बाउंडेशन स्ट्रॉन्ग होगा। उनके साथ गेम खेलें, कहानियां सुनाएं। ये छोटे-छोटे पल बच्चों की मेमोरी में जा बैठते हैं। मानसिक स्तर पर वे ज्यादा खुश भी रहते हैं। फन के साथ-साथ क्रिएटिव एक्टिविटीज भी उनके साथ करें। होमवर्क करते समय साथ बैठें। कोई अच्छी मूवी आई हो, तो सीडी मंगवाकर उनके साथ बैठ के देख सकते हैं, या प्रेरक वीडियो वगैरह भी उनके साथ देख सकते हैं। आपका ये साथ उनको जरूर हर क्षेत्र में अव्वल बनाएगा और आप बन जाएंगे उनके रोल मॉडल।

Source :- https://bit.ly/2RZ8aId

Friday, November 16, 2018

15 Benefits of Drinking Lemon Water in Morning Empty Stomach

Lemon is one of the most popular and versatile citrus fruit. Its popularity is owed to it’s refreshing flavor and scent making it a popular choice for flavoring many recipes and perfumes. Lemon is also widely used in all sorts of drinks from teas and cocktails to juices. Along with its obvious use as a flavor, lemon since long has also been used for its medicinal value. A rich source of vitamin C, lemon possess immense health benefits ranging from its antibacterial and antiviral properties to its immune boosting abilities. One of the most common ways to reap the health benefits of lemon is by juicing it. Lemon juice acts as a digestive and a detoxifying agent and helps in cleaning the liver leading to better digestive health.




Lemon juice is also an effective way to reduce weight as it increases the body’s metabolic rate. For people looking to use lemon for its weight loss abilities, drinking lemon juice with warm water on an empty stomach every morning can produce amazing results. Along with the weight loss benefits, drinking warm lemon water every morning also has numerous other benefits. The nutrition experts at Edison Institute of Nutrition have listed some of the most effective health benefits of drinking lemon juice with warm water every morning.

First Thing in Morning. 

  1. As a rich source of vitamin C, lemon juice protects the body from Immune system deficiencies.
  2. Drinking lemon juice with warm water every morning helps in maintaining the pH balance of the body.
  3. With its powerful antibacterial properties, lemon juice helps fight infections
  4. Acts as a detoxifying agent.
  5. Helps with maintaining digestive health.
  6. Along with vitamin C, lemons are also a rich source of potassium, calcium, phosphorus, magnesium etc.
  7. Helps fight common cold
  8. Lemon water is also a popular remedy for many kinds of skin problems ranging from acne, rashes and wrinkles to dark spots.
  9. Lemon juice with warm water helps in quick weight loss as it promotes digestion and increases the metabolic rate.
  10. Lemon juice is also very effective at cleansing the liver as it promotes the liver to flush out toxins
  11. Lemon’s anti-inflammatory properties help in fighting respiratory tract infections, sore throat and inflammation of tonsils.
  12. Lemon juice with warm water helps keep the body hydrated as it provides electrolytes to the body.
  13. Drinking lemon juice with warm water also helps reduce joint and muscle pain.
  14. Lemon juice with warm water is also good for your dental health as it helps with toothache and prevents gingivitis.
  15. Lemon juice with warm water helps with digestion and hence, helps regulate natural bowel movement.
Source :- https://bit.ly/2ftgC4v

Wednesday, November 14, 2018

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए आज से ही शुरू करें ये 5 घरेलू उपाय.

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें और परहेज करें. इसके अलावा कई ऐसे घरेलू उपाय हैं जिनसे आप डायबिटीज कंट्रोल करके एक सामान्य जीवन जी सकते हैं.

मोटापा और डायबिटीज आज के समय की दो सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं हैं. अस्त-व्यस्त जीवनशैली, गलत खानपान इसके प्रमुख कारण हैं लेकिन लाइफस्टाइल और भोजन की आदतों में सुधार करके हम इन समस्याओं से बच सकते हैं.


डायबिटीज में ब्लड शुगर का लेवल बहुत बढ़ जाता है जिससे शरीर की इंसुलिन उत्पादन क्षमता प्रभावित होने लगती है. कई बार ऐसा भी होता है कि शरीर सक्रिय रूप से इंसुलिन का इस्तेमाल ही नहीं कर पाता हैं.

डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी तो ये है कि आप अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें और परहेज करें. इसके अलावा कई ऐसे घरेलू उपाय हैं जिनसे आप डायबिटीज को कंट्रोल करके एक सामान्य जीवन जी सकते हैं.

1. तुलसी की पत्त‍ियों के इस्तेमाल से कंट्रोल करें डायबिटीज
तुलसी की पत्त‍ियों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स को इंसुलिन के प्रति सक्रिय बनाती हैं. ये सेल्स इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाती हैं. सुबह उठकर खाली पेट दो से तीन तुलसी की पत्ती चबाएं. आप चाहें तो तुलसी का रस भी पी सकते हैं. इससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है.

2. दालचीनी का पाउडर लेना भी है बहुत फायदेमंद
दालचीनी भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख मसाला है. दालचीनी के प्रयोग से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है. ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करने और नियंत्रित करने में मददगार है. इसके नियमित सेवन से मोटापा भी कम किया जा सकता है. दालचीनी को महीन पीसकर पाउडर बना लें और उसे गुनगुने पानी के साथ लें. मात्रा का विशेष ध्यान दें. बहुत अधिक मात्रा में ये पाउडर लेना खतरनाक हो सकता है.

3. ग्रीन टी पीना भी है फायदेमंद
ग्रीन टी में उच्च मात्रा में पॉलीफिनॉल पाया जाता है. ये एक सक्रिय एंटी-ऑक्सीडेंट है. जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार है. प्रतिदिन सुबह और शाम ग्रीन टी पीने से फायदा होगा.

4. सहजन की पत्त‍ियों का रस भी है फायदेमंद
सहजन की पत्त‍ियों का रस भी डायबिटीज कंट्रोल करने में बहुत कारगर है. ड्रमस्ट‍िक की पत्त‍ियों को पीसकर उसे निचोड़ ले और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. इससे शुगर लेवल बढ़ेगा नहीं.

5. जामुन के बीजों के सेवन से
जामुन के बीज भी डायबिटीज कंट्रोल करने में फायदेमंद हैं. जामुन के बीजों को अच्छी तरह सुखा लें. सूखने के बाद इन्हें पीसकर एक चूर्ण बना लें. सुबह खाली पेट जामुन के बीजों को गुनगुने पानी के साथ लें. इससे डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.




Tuesday, September 25, 2018

भगवान् गणेश का जन्म कैसे हुआ ?



एक हैं जगत के सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी और दूसरे हैं जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु। इन दोनों के अलावा एक मात्र भगवान शिव हैं जिनकी शक्ति के सामने देव और दानव सिर झुकाते हैं। भगवान विष्णु तो समय-समय पर अवतार लेकर दुनिया से पाप और पापियों का नाश करते हैं लेकिन एक समय ऐसा आया जब उबटन से बना एक बालक जीवित हो उठा।
इस बालक ने भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा जी को युद्ध के लिए ललकारा और अपनी युद्ध कला से चकित कर दिया। इस बालक का निर्माण देवी पार्वती ने स्नान के समय किसी को कैलाश पर नहीं पाकर अपनी सुरक्षा के लिए तैयार किया था। इस घटना का वर्णन शिव पुराण में मिलता है। देवी पार्वती ने बालक से कहा कि मैं स्नान करने जा रही हूं। जब तक मैं स्नान करके नही आती हूं तुम द्वार पर पहरा दो।

इस बीच महादेव भ्रमण करते हुए कैलाश पहुंच गए। बालक ने महादेव को भी रोक दिया। भगवान शिव ने बालक को कफी समझाया लेकिन उसने भगवान शिव की एक नहीं मानी। इसी बीच ब्रह्मा और विष्णु भी कैलाश आ पहुंचे। ब्रह्मा विष्णु ने बालक को बल पूर्वक हटाने का प्रयास किया तब बालक ने दोनों देवताओं से भयंकर युद्ध किया। शिव इससे क्रोधित हो उठे और द्वारपाल बने उस बालक पर त्रिशूल का प्रहार कर दिया।

बालक का सिर माता को पुकारते हुए भूमि पर गिर पड़ा। देवी पार्वती जब स्नान करके बाहर आई तो इस दृश्य को देखा तो उग्र हो गईं। क्रोध में आककर पार्वती संसार को नष्ट करने लगी। पार्वती जी को मनाने के लिए विष्णु जी ने एक हाथी का सिर उस बालक के धड़ से जोड़ दिया और यह बालक गणपति के नाम से संसार में विख्यात हो गया।

भगवान शिव और पार्वती ने इस वीर बालक को पुत्र के रूप में स्वीकार किया और गणों में प्रधान गणेश नाम दिया। इनकी पूजा का दिन यानी गणेश चतुर्थी इस वर्ष 9 अगस्त को है।

source : https://bit.ly/2Q5F0qd 

Monday, September 24, 2018

भगवान शिव ने नीलकंठ क्यों पीया ?




भोलेनाथ के नाम
भोलेनाथ, महादेव, महेश नाजाने कितने नामों से जाने जाने वाले भगवान शिव अपने भक्तों के बीच भोलेनाथ के नाम से ज्यादा लोक प्रिय हैं। भगवान शिव अपने भक्तों में ना तो भेदभाव करते हैं और अन्य देवी-देवताओं की अपेक्षा उनसे बहुत ही जल्द प्रसन्न भी हो जाते हैं। यही वजह है कि उनके भक्त उन्हें भोलेनाथ कहते हैं।


विनाश की बागडोर
सृष्टि के विनाश की डोर संभाले भगवान शिव का एक और ना भी है, नीलकंठ। इस नाम के पीछे का कारण है उनका नीला कंठ, जो इस बात का प्रमाण है कि शिव सृष्टि को बुराई और पाप से बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।


शिव का स्वरूप
शिव के स्वरूप को कुछ इस तरह बेहतर समझा जा सकता है, बालों में गंगा को संभाले, बालों में चंद्र का मुकुट और गले में सांप को लटकाए, हाथ में त्रिशूल और अपने प्रिय वाहन नंदी की सवारी करने वाले वो देव जो हमेशा सेही मानव जाति के रक्षक और बुरी शक्तियों के लिए विनाशक रहे हैं।


भिन्न-भिन्न स्वरूप
शिव के भिन्न-भिन्न भक्त उन्हें भिन्न-भिन्न स्वरूपों में देखते हैं। इन्हीं स्वरूपों के आधार पर उन्हें अलग-अलग नाम भी दिए गए हैं। आज हम आपको उनके नीलकंठ होने का रहस्य बताएंगे।


इन्द्र को श्राप
पुराणों के अनुसार एक बार दुर्वासा ऋषि ने अपने अपमान से क्रोधित होकर देवराज इन्द्र को यह श्राप दिया कि वे लक्ष्मी (धन) विहीन हो जाएंगे। ऐसे में इन्द्र, भगवान विष्णु के पास सहायता मांगने के लिए गए। भगवान विष्णु ने उन्हें श्राप से मुक्ति पाने का एक मार्ग बताया।


समुद्र मंथन
भगवान विष्णु ने इन्द्र देव को असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने को कहा, जिसके लिए असुरों को अमृत का लालच दिया गया।


मंथन की शुरुआत
मंदार पर्वत, वासुकी नाग और स्वयं भगवान विष्णु के कच्छप अवतार की सहायता से समुद्र मंथन की शुरुआत हुई, एक तरफ असुर और दूसरी तरह देवता।


14 लाभदायक वस्तुएं
इस मंथन के दौरान समुद्र में से 14 लाभदायक और बहुमूल्य वस्तुएं निकली जैसे इच्छा पूर्ति करने वाली कामधेनु गाय, कल्पवृक्ष, एहरावत हाथी, अप्सरा रंभा आदि।



देवता-असुर
इन सभी वस्तुओं को देवताओं और असुरों के बीच बराबर बांटा गया लेकिन इसके बाद जो निकला उसे ना तो देवता लेने के लिए तैयार थे और ना ही असुर।

हलाहल विष
जब इस मंथन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया तो क्षीर सागर में से हलाहल नाम का ऐसा घातक विष निकला जिसकी एक बूंद भी बड़ा सर्वनाश कर सकती थी।


शिव की सहायता
इस हलाहल का पान करने के लिए ना तो देवता तैयार हो रहे थे और ना ही असुर। इसकी एक बूंद भी धरती पर पड़ती तो बड़ी तबाही हो जाती, ऐसे में देवता और असुर मिलकर भगवान शिव के पास सहायता मांगने गए।


जहर का पान
शिव जी बहुत दयालु और अपने भक्तों की रक्षा करने वाले हैं, बिना किसी बात की परवाह किए उन्होंने देवताओं और असुरों की समस्या को सुलझाने और ब्रह्मांड को विनाश से बचाने के लिए उस जहर का पान कर लिया।



नीलकंठ
माता पार्वती जानती थीं कि यह विष स्वयं महादेव के लिए भी घातक है इसलिए उन्होंने अपने हाथों से शिव के गले को पकड़ उस जहर को उनके गले में ही रोक दिया। जिसकी वजह से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया। इस घटना के बाद से ही शिव को नीलकंठ का नाम दिया गया।


शिवरात्रि
समुद्र मंथन की घटना के उपलक्ष्य और भगवान शिव को धन्यवाद देने के लिए प्रतिवर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।

 source : https://bit.ly/2puLXpm 
 

Thursday, September 20, 2018

विष्‍णु भगवान के चार हाथों के पीछे है इतनी बड़ी कहानी




हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु को धरती पर सबसे ज्यादा मनुष्य रूप में अवतार लेने वाले सभी देवताओं में सबसे पहला स्थान दिया जाता है।

अक्सर शेषनाग की शैय्या पर मौन होकर लेटे रहने वाले भगवान विष्णु का एक ऐसा रहस्य है जो उनके आशीष देने वाले हाथ से जुड़ा है।
पौराणिक कथा के मुताबिक, प्राचीनकाल में जब भगवान शिव के मन में सृष्टि की रचना का विचार आया तो उन्होंने अपनी अंतर्दृष्टि से भगवान विष्णु को उत्पन्न किया।

इसी गलती से सुदामा को मिली थी गरीबी

उन्हें चार हाथ भी प्रदान किए जिसमें कई शक्तियां विदमान हैं। भगवान विष्णु के दो हाथ मनुष्य के लिए भौतिक फल देने वाले हैं, पीठ की तरफ बने हुए दो हाथ मनुष्य के लिए आध्यात्मिक दुनिया का मार्ग दिखाते हैं।

माना जाता है कि भगवान विष्णु के चार हाथ चारों दिशाओं की भांति अंतरिक्ष की चारों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्रीहरि के यह चारों हाथ मानव जीवन के लिए चार चरणों और चार आश्रमों के प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं-


पहला - ज्ञान के लिए खोज (ब्रह्मचर्य )।


दूसरा - पारिवारिक जीवन (गृहस्थी)


तीसरा - वन में वापसी (वानप्रस्थ)


चौथा - संन्यास (संन्यासी जीवन)। 


                                                                                                                source - https://bit.ly/2Npk1Sn