Shri Radhe Maa, also called Mamtamai Shri Radhe Guru Maa and Guru Maa by her devotees, is a Hindu spiritual teacher and guru from India. Shri Radhe Maa emphasises the need for surrender to God, humility, truthfulness, self-discipline and self-restrain. Radhe Maa urges devotees to engage with society through initiatives like donation of blood, clothes, food, books and medicines to orphanages, old age homes and sadhus
Monday, January 7, 2019
Friday, January 4, 2019
भगवान राम के जीवन से जुड़े 2 प्रेरक प्रसंग |
अपने पिता महाराज दशरथ की आज्ञा पाकर श्रीराम सीता मैया और लक्षमण जी के साथ 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए अयोध्या से प्रस्थान कर गए. इसके बाद वे प्रयाग (इलाहाबाद), चित्रकूट, पंचवटी ( नासिक ), दण्डकारण्य, लेपक्षी, किश्किन्दा, रामेश्वरम, आदि स्थानों पर रहे और इस दौरान उनके साथ कई प्रसंग घटे.
प्रसंग #1 – शूर्पणखा की नाक काटना
जब भगवान् राम पंचवटी में रह रहे थे तभी एक दिन रावण की बहन शूर्पणखा एक सुंदरी का रूप धारण कर उनके पास आई और उनके दिव्य स्वरुप से मोहित हो कर उनसे विवाह करने के लिए कहने लगी.
इस पर श्रीराम ने अपनी पतिव्रता पत्नी सीता के बारे में बताया और कहा कि वह उनके अनुज लक्ष्मण के पास जाए.
जब शूर्पणखा ने लक्षमण जी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा तो वह बोले, ” हे सुंदरी! मैं तो भगवान् राम का दास हूँ यदि तुमने मुझसे विवाह किया तो तुम्हे भी उनकी दासी बनना पड़ेगा. और यह तो तुम्हारे सम्मान के विरुद्ध होगा. तुम राम भैया के पास जाओ वही सबके स्वामी हैं वही सबकुछ करने में समर्थ हैं.
यह सुनकर शूर्पणखा क्रोध से लाल हो गयी और रामजी से बोली, “शायद तुम्हे मेरी असीम शक्ति का ज्ञान नहीं है, जो तुम मेरे निवेदन को ठुकरा कर मेरा उपहास कर रहे हो.”
और ऐसा कह कर वह अपने असली रूप में आ गयी और सीता मैया को खाने के लिए दौड़ी.
यह देख श्री राम ने लक्षमण को उसे दण्डित करने का संकेत दे दिए और लक्षमण जी ने अपनी तलवार से उसके नाक-कान काट दिए.
प्रसंग #2 – खर-दूषण से युद्ध
नाक-कान कटने के बाद शूर्पणखा खून से लथपथ अपने भाइयों खर-दूषण के पास दौड़ी गयी और खर से बोली, “भाई! धिक्कार है तुम्हारे बल और पराक्रम पर. आज तुम्हारे राज्य में साधारण मनुष्यों की हिम्मत इतनी बढ़ गयी है कि उन्होंने मेरा ये हाल करने का दुःसाहस कर दिया है.”
और शूर्पणखा ने अपने साथ घटी घटना बता दी.
और शूर्पणखा ने अपने साथ घटी घटना बता दी.
यह सुन कर खर क्रोधित हो उठा और तत्काल अपने भाई दूषण और 14 हज़ार राक्षसों की सेना लेकर राम-लक्षमण पर आक्रमण करने के लिए निकल पड़ा. उसकी इस विशाल सेना में एक से बढ़ कर एक पराक्रमी व दिव्यास्त्रों से सुसज्जित राक्षस मौजूद थे.
उनके आने का कोलाहल सुनकर श्रीराम ने लक्षमण जी से सीता मैया को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने को कहा और स्वयं अपना धनुष और अक्षयबाण वाले दो तरकस बाँध कर तैयार हो गए.
जल्द ही राक्षस वहां आ पहुंचे और नाना प्रकार के अश्त्रों-शश्त्रों से उन पर वार करने लगे. पर श्रीराम ने एक-एक कर के उनके सारे अश्त्र -शश्त्र काट डाले और सहस्त्रों बाणों से खर-दूषण समेत समस्त राक्षसों का संहार कर दिया.
इस प्रकार रघुवंशियों में श्रेष्ठ श्रीराम ने आधे पहर में ही इतनी विशाल और सूरवीरों से भरी सेना को अकेले ही समाप्त कर दिया|
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Source: https://bit.ly/2F9oELF
Thursday, January 3, 2019
सरस्वती देवी को ज्ञान देवी क्यों माना जाता है ?
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| जानिये सरस्वती देवी को ज्ञान देवी क्यों माना जाता है .. |
मां सरस्वती विद्या, संगीत और बुद्धि की देवी मानी गई हैं। सरस्वती सारे संशयों का निवारण करने वाली और बोधस्वरूपिणी हैं। इनकी उपासना से सब प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये संगीतशास्त्र की भी अधिष्ठात्री देवी है। ताल, स्वर, लय, राग-रागिनी आदि इन्ही की दी गई मानी जाती हैं।सात प्रकार के सुरों से इनका स्मरण किया जाता है। इसलिए ये स्वरात्मिका कहलाती हैं। सप्तविध स्वरों का ज्ञान देने के कारण ही इनका नाम सरस्वती है। वीणावादिनी सरस्वती ने संगीतमय जीवन जीने की प्रेरणा है। वीणा बजाने से शरीर एकदम स्थिर हो जाता है। इसमें शरीर का हर अंग समाधि अवस्था को प्राप्त हो जाता है। सामवेद के सारे विधि-विधान केवल वीणा के स्वरों पर बने हुए हैं।सरस्वती के सभी अंग सफेद हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि सरस्वती सत्वगुणी प्रतिभा स्वरूप है। देवी भागवत के अनुसार सरस्वती को ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनो पूजते हैं। कमल गतिशीलता का प्रतीक है।
यह निरपेक्ष जीवन जीने की प्रेरणा देता है। हाथ में पुस्तक सभी कुछ जान लेने, सभी कुछ समझ लेने की सीख देती है। लेखक कवि, संगीतकार सभी सरस्वती की प्रथम वंदना करते हैं। उनका विश्वास है कि इससे उनके भीतर रचना की ऊर्जा शक्ति पैदा होती है। इसके अलावा मां सरस्वती देवी की पूजा से रोग, शोक, चिंताएं और मन का संचित विकार भी दूर होते हैं।इस तरह वीणाधारिणी मां सरस्वती की पूजा आराधना में मानव कल्याण का समय जीवनदर्शन के लिए है। याज्ञवल्क्य वाणी स्तोत्र, वशिष्ठ स्तोत्र आदि में सरस्वती की पूजा व उपासना का वर्णन है। एक दृष्टांत के अनुसार कुंभकर्ण की तपस्या से संतुष्ट होकर ब्रह्मा उसे वरदान देने पहुंचे, तो उन्होंने सोचा कि यह दुष्ट कुछ भी न करें, केवल बैठकर भोजन ही करे, तो यह संसार उजड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने सरस्वती को बुलाया सारद प्रेरितासुमति फेरी। मागेसि नींद मास षट् केरी। यह कहकर उसकी बुद्धि विकृत करा दी। परिणाम यह हुआ कि वह छह माह की नींद मांग बैठा। इस तरह कुंभकर्ण में सरस्वती का प्रवेश उसकी मौत का कारण बना।
Source:https://bit.ly/2AwyGm7
Wednesday, January 2, 2019
भगवान विष्णु से जुड़ी ऐसी 5 ख़ास बातें ।
ऐसा माना गया है कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से गुरु ग्रह को शांत करने में मदद मिलती है. क्योंकि विष्णु जी सौरमंडल के गृह गुरु का प्रतिनिधित्व करते हैं. साथ ही पीला रंग विष्णु जी का अति प्रिय है. इस दिन पीले कपड़े पहनने चाहिए और पीली चीज़ों से ही इनकी पूजा की जानी चाहिए. जैसे केला, पीले फूल, बेसन के लड्डू या पीले मीठे चावल. यहां हम भगवान विष्णु जी से जुड़ी 5 बातें बता रहे हैं जिन्हें विष्णु जी के साधक को ज़रूर जानना चाहिए |
1. विष्णु जी के चार हाथ जीवन के इन चार चरणों को दर्शातें हैं पहला- ज्ञान की खोज, दूसरा- पारिवारिक जीवन, तीसरा- वन में वापसी और चौथा संन्यास.
2. उनके कानों के दो कुंडल दो विपरित चीज़ों के जोड़ को दर्शाते हैं. जैसे ज्ञान और अज्ञान, सुख और दुख आदि.
3. उनके मुकुट पर लगा मोर पंख, उनके कृष्ण अवतार को दर्शाता है. ऐसा माना भी जाता है कि ये विष्णु जी ने कृष्ण भगवान से लिया है.
4. विष्णु जी की छाती पर बना श्रीवस्ता उनका लक्ष्मी जी के लिए प्रेम को दर्शाता है.
5. ऐसा माना जाता है कि विष्णु जी की नाग पर लेटे हुए रूप का अर्थ है कि मनुष्यों को सुख और खुशियों के साथ-साथ कई समस्याओं से भी उसी वक्त गुज़रना पड़ता है. यानि सुख के साथ दर्द भी. इसीलिए जीवन के इस सच को वो सांपों के ऊपर लेटकर मुस्कुराते हुए दर्शाते हैं |
Source:https://bit.ly/2VqPe80
Tuesday, January 1, 2019
श्री कृष्ण से जुडी कुछ रहस्यमयी बातें |
दोस्तों केवल भारत में ही नहीं परंतु विश्व भर में भगवान श्री कृष्ण की लीला प्रचलित है श्री हरी भगवान् विष्णु के अवतार कृष्ण के बारे में जो लोग जितना जानते है उनके मन उनके बारे में और ज्यादा जानने की इच्छा जगती है आप में से बहुत सारे लोग भगवान श्रीकृष्ण की कथा जानते होंगे परंतु आज हम भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी कुछ ऐसे रहस्य के बारे में बता रहे है जो शायद आप नहीं जानते होंगे |
श्री कृष्ण का रंग
पुराण के अनुसार कुछ लोग कृष्ण जी की त्वचा का रंग काला और ज्यादातर लोग शाम रंग का मानते हैं श्याम रंग अर्थात कुछ कुछ काला और कुछ कुछ नीला मतलब कि काले जैसा नीला जैसा कि सूर्यास्त के बाद जब दिन अस्त होने वाला होता है तो आसमान का रंग काले जैसा नीला हो जाता है जनश्रुति अनुसार उनका रंग ना तो काला और ना ही नीला था उनका रंग काला मिश्रित नीला भी नहीं था असल में उनकी त्वचा का रंग मेघश्याम था यानी एक बादल के समान अर्थात काला नीला और सफेद का मिश्रित रंग था |
कृष्ण जी के गंध
माना जाता है कि श्री कृष्ण जी के शरीर से एक मादक गंध निकलती रहती थी इस इस गंध को वह अपने गुप्त अभियानों में छुपाने का उपक्रम करते थे चौंकाने वाली बात यह है कि यही खूबी द्रोपदी में भी थी द्रौपदी के शरीर से से भी सुगंध निकलते रहती थी लोगों का मानना है कि यह खूबी के कारण ही श्री कृष्ण जी ने द्रौपदी को अपनी बहन माना था माना जाता है कि श्री कृष्ण के शरीर से निकलने वाली गंध गोपीका चंदन और कुछ कुछ रातरानी की सुगंध से मिलती-जुलती थी कुछ लोग उसे अष्टगंध भी कहते हैं |
श्रीकृष्ण की मृत्यु
श्री कृष्ण का बचपन गोकुल वृंदावन बरसाना आदि जगहों पर बीता था कंस का वध करने के बाद उन्होंने अपने माता पिता को कंस के कारागार से मुक्त कराया और फिर जनता के अनुरोध से मथुरा का राजभर संभाला उसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने द्वारिका में अपना निवास स्थान बनाया और यही नहीं उन्होंने महाभारत युद्ध में भी भाग लिया महाभारत के युद्ध के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण कौरवों की माता गांधारी के पास गए तो गांधारी ने अपने सभी पुत्रों की मृत्यु से क्रोधित होकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने पुत्रों की मृत्यु का कारण बताते हुए उन को श्राप दे दिया की तुम्हारे कारण जिस तरह मेरे पुत्रों का नाश हुआ है उसी प्रकार तुम्हारे वंश का भी आपस में एक दूसरे को मारकर नाश हो जाएगा उसी श्राप के कारण मदिरापान के नशे में श्री कृष्ण के वंशज आपस में लड़ने लगे और एक दूसरे को मारने लगे जिसके कारण भगवान श्री कृष्ण और उनके साथ कुछ ही लोग जीवित बचे थे एक दिन इसी प्रभाव क्षेत्र के वन में श्री कृष्ण एक पीपल के वृक्ष के नीचे लेटे हुए थे तभी जरा नामक एक बहेलिया ने भूलवश भगवान श्रीकृष्ण को हिरन समझकर विष युक्त बाण चला दिया वाण से भगवान भगवान श्री कृष्ण के पैरों के तलवे में जाकर लगा और भगवान श्रीकृष्ण ने इसी को बहाना बनाकर अपना शरीर का त्याग कर दिया |
मार्शल आर्ट के जन्मदाता भगवान श्री कृष्ण
भारतीय परंपरा और जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी ने ही मार्शल आर्ट का आविष्कार किया था दरअसल पहले इसे अलारी प्लाटो कहा जाता था इस विधि के मदद से ही भगवान श्रीकृष्ण ने चारु ओर और अन्य कई दैत्यों का वध किया था उनकी उम्र कुछ 16 वर्ष की ही थी उन्होंने मथुरा के राजा का सर को अपने हथेली के प्रहार से ही काट दिया था दोस्तों जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने मार्शल आर्ट का आविष्कार भरत क्षेत्र के वनों में किया था डांडिया रास उसी का एक नित्य रूप है मार्शल आर्ट का जन्मदाता भगवान श्रीकृष्ण को ही माना जाता है हालांकि इसके बाद इस विधि को अगस्त मुनि ने प्रचारित किया था इस कारण भी नारायणी सेना भारत के सबसे भयंकर सेना और प्रलयकारी सेना बन गई थी भगवान श्रीकृष्ण नहीं मार्शल आर्ट की नींव रखी थी जो बाद में बौद्ध धर्म से होते हुए मार्शल आर्ट के नाम से प्रसिद्धि हुआ बौद्ध धर्म के कारण ही यह विद्या चीन-जापान आदि बौद्ध क्षेत्रों में खूब फली-फूली आज भी यह विद्या केरल और कर्नाटक में प्रचलित है |
श्री कृष्ण की पत्नियां
भगवान श्री कृष्ण के बारे में कहा जाता है कि उनकी 16100 पत्नियां थी लेकिन यह तथ्य गलत है भगवान श्रीकृष्ण की मात्र 8 पत्नियां थी श्री कृष्ण जी की जींस 16000 पत्नियों के बारे में कहा जाता है दरअसल वे सभी नरकासुर के यहां बंधक बनाई हुई महिलाएं थी जिनको भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त करवाया था वो सभी महिलाएं किसी की मां थी किसी की बहन और किसी की बीवी थी जिनको नरकासुर अपहरण करके अपने यहाँ बंदी बनाए हुए था सभी महिलाओं की इज्जत बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने उन् सभी को अपनी पत्नियां होने का दर्जा दिया था |
तो दोस्तों यह था भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी कुछ रहस्यमई बातें |
Source: https://bit.ly/2ToLv9g
Monday, December 31, 2018
सफला एकादशी -जानिए संपूर्ण पूजन विधि, कथा व महत्व |
पौष मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 18 दिसंबर, गुरुवार को है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से भगवान श्रीकृष्ण बहुत प्रसन्न होते हैं। इस व्रत की विधि इस प्रकार है-
सफला एकादशी के दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहन कर माथे पर चंदन लगाकर कमल अथवा वैजयंती फूल, फल, गंगा जल, पंचामृत व धूप-दीप से भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा एवं आरती करें। भगवान श्रीहरि के विभिन्न नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए फलों के द्वारा उनका पूजन करें। पूरे दिन निराहार रहें, शाम को दीपदान के बाद फलाहार कर सकते हैं।
इस रात्रि को वैष्णव संप्रदाय के लोग भगवान श्रीहरि का नाम-संकीर्तन करते हुए जागते हैं। सफला एकादशी की रात जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता, ऐसा धर्मग्रंथों में लिखा है।
सफला एकादशी के दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहन कर माथे पर चंदन लगाकर कमल अथवा वैजयंती फूल, फल, गंगा जल, पंचामृत व धूप-दीप से भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा एवं आरती करें। भगवान श्रीहरि के विभिन्न नाम-मंत्रों का उच्चारण करते हुए फलों के द्वारा उनका पूजन करें। पूरे दिन निराहार रहें, शाम को दीपदान के बाद फलाहार कर सकते हैं।
इस रात्रि को वैष्णव संप्रदाय के लोग भगवान श्रीहरि का नाम-संकीर्तन करते हुए जागते हैं। सफला एकादशी की रात जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता, ऐसा धर्मग्रंथों में लिखा है।
द्वादशी (19 दिसंबर, शुक्रवार) के दिन भगवान की पूजा के पश्चात कर्मकाण्डी ब्राह्मण को भोजन करवा कर जनेऊ एवं दक्षिणा देकर विदा करने के पश्चात भोजन करें।
Source: https://bit.ly/2St7L1D
भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग मंदिरों के बारे में जानकारी |
1.) सोमनाथ मंदिर
सुंदर राज्य गुजरात में स्थित सोमनाथ के मंदिर का सबसे शुभ और सुंदर ज्योतिर्लिंग 12 से बाहर माना जाता है। यह पहली तीर्थ स्थल के रूप में माना जाता है और पूरे देश में महान महत्व रखती है। सोमनाथ मंदिर के इतिहास में अमीर है और 16 बार पुन: निर्मित किया गया है करने के लिए कहा है और इसलिए दैवीय और महान माना जाता है।
2.)महाकालेश्वर मंदिर
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन के सुंदर शहर में मध्य प्रदेश में स्थित है और जिज्ञासा का विषय हो सकता है क्योंकि यह स्वयं मौजूदा या “स्वयंभू मूर्ती एक चबुतरेपर” माना जाता है माना जाता है। शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग एक साथ यहाँ देखा जा सकता है और यह दक्षिण का सामना केवल मंदिर है। यह माना जाता है कि भगवान शिव यहाँ अवतीर्ण असामयिक मौतों से अपने भक्तों को बचाने के लिए।
3.) मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर
आंध्र प्रदेश, श्रीसैलम के शहर में स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर एक खूबसूरती से मूर्ति मंदिर, वास्तुकला और डिजाइन में समृद्ध है। शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग एक साथ इस मंदिर में हैं। यह सदियों से तीर्थ यात्रा के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। श्रीसैलम पहाड़ी अत्यंत पवित्र माना जाता है और लोगों का मानना है कि एक बस इस स्थान पर जन्म लेने के द्वारा मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। ब्रह्मराम्बा देवी और ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में स्वयं प्रकट होने के लिए विश्वास कर रहे हैं।
4.) ममलेश्वर मंदिर
मंदिर मध्य परदेश में स्थित है और इसकी संस्कृति, इतिहास और विरासत में समृद्ध माना जाता है। यह मंदिर हिन्दू भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह मंदिर कुंण्डली ओंकारेश्वर मंदिर नदी नर्मदा के तट पर स्थित है। हालांकि ओंकारेश्वर दोनों से बाहर और अधिक प्रसिद्ध है लेकिन ममलेश्वर वास्तविक ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर के रूप में केवल एक हॉल और गर्भगृह से युक्त अन्य ज्योतिर्लिंग के रूप में बड़ा नहीं है | महाशक्ति मूर्ति (देवी पार्वती) भी शिव मूर्ति के पीछे स्थित है और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के आसपास कई छोटे मंदिर हैं।
5.) केदारनाथ
यह रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय रूप में अच्छी तरह से भक्तों को आकर्षित करने का सबसे प्रसिद्ध और देखी गई शिव मंदिरों में से एक है केदारनाथ कोई परिचय की जरूरत है। उत्तराखंड की खूबसूरत घाटी में स्थित, केदारनाथ भगवान शिव का पवित्र कैलाश पर्वत पर निवास करने के लिए निकटतम मंदिर है। यह चार धाम यात्रा, हिंदू धर्म में प्रसिद्ध का हिस्सा है। यह कहा जाता है कि भगवान शिव एक जंगली सूअर का रूप ले लिया और केदारनाथ में पृथ्वी में डुबकी लगाई और बाहर पशुपतिनाथ में उभरा। यहाँ शुद्ध घी केदारनाथ में विश्वास है कि जंगली सूअर घायल हो गया था पर की पेशकश की है।
6.)काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी, उत्तर प्रदेश, में स्थित मंदिर शायद हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र तीर्थ है। हिंदू पवित्र तीर्थ यात्रा के लिए कम से कम करने के लिए वाराणसी जाने की संभावना है लोगों को अपने जीवनकाल में। मुख्य देवता भगवान विश्वनाथ और पवित्रतम सभी शिव मंदिरों की है। यह पश्चिमी पवित्र नदी गंगा के तट पर स्थित है। मंदिर जहां शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग एक साथ कर रहे हैं जगह है। काशी विश्वनाथ मंदिर में डिजाइन सुंदर और इतिहास और विरासत में समृद्ध है और वाराणसी के सबसे पुराने शहर में स्थित होने का विशेषाधिकार रखती है।
7.)भीमाशंकर मंदिर
मंदिर महाराष्ट्र में स्थित है और भी कई कारणों के लिए बहस का एक केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण विश्वकर्मा वास्तुशिल्पियों के उत्कृष्ट शिल्प कौशल से पता चलता है। इस तीर्थ स्थान है सबसे सुंदर घने जंगलों और वन्य जीवन से घिरा हुआ और करने के लिए स्वर्ग के रूप में संदर्भित किया जाता है। मंदिर की यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय अगस्त और फ़रवरी है।
8.) त्र्यंबकेश्वर मंदिर
मंदिर में महाराष्ट्र के राज्य, त्र्यंबक के शहर में स्थित है और भगवान शिव के पवित्र मंदिरों में से एक है। ज्योतिर्लिंग की रचना ही मनोरंजक, भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र embodying तीन चेहरे रही है। मंदिर काले पत्थरों के साथ पूरी तरह से बनाया गया है। मंदिर गुरुकुल और गणित पर मकान और अष्टांग योग के लिए एक केंद्र भी है। भगवान शिव की मूर्ति नास्सक हीरा है जो अंग्रेजों द्वारा लूट लिया गया था का उपयोग कर बनाया गया था। जगह अपने नैसर्गिक सौंदर्य और रसीला हरी वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
9.)नागेश्वरा मंदिर
सुंदर मंदिर महाराष्ट्र में स्थित है और 12 वीं सदी में बनाया गया था। सबसे सुंदर सुविधा कि नागेश्वरा ज्योतिर्लिंग शिव पुराण में उल्लेख किया जाना करने के लिए विशेषाधिकार रखता है। 25 भगवान शिव की प्रतिमा और एक सुंदर तालाब बैठा हूँ इस जगह के मुख्य आकर्षण हैं। दुनिया भर में सभी तीर्थयात्रियों के हजारों हर साल मंदिर को आकर्षित करती है।
10.)वैद्यनाथ मंदिर
सुंदर मंदिर बचतगट, महाराष्ट्र में स्थित है। बाबा वैद्यनाथ धाम और वैद्यनाथ धाम मंदिर रूप में भी जाना जाता है। मंदिर बाबा वैद्यनाथ के मंदिर के रूप में अच्छी तरह के 21 अन्य मंदिरों के होते हैं। एक धारणा के अनुसार यह इस मंदिर जहां रावण उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की पूजा करने के लिए इस्तेमाल किया था। भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रभावित उसे (कोई वैद्य या डॉक्टर की तरह) के रूप में रावण घायल हो गया था और इसलिए इसका नाम मंदिर निकला ठीक हो।
11.)रामेश्वरम मंदिर
मंदिर तमिल नाडु राज्य में स्थित है और विशाल शिव मंदिरों में से एक है। यह रामेश्वरम स्तंभ है। यह माना जाता है कि किसी को भी, जो चाहता है बंद उसके पापों को धोता स्थित मंदिर के पास कम से कम एक बार पवित्र जल में डुबकी लेने चाहिए। 15 एकड़ में फैला हुआ यह माना जाता है कि प्रभु राम खुद यहाँ लिंग स्थापित किया। मंदिर उच्च और उदात्त गोपुरम और खूबसूरती से मूर्ति दीवारों और एक नंदी की प्रतिमा है। यह कहा जाता है कि जो कोई भी चला जाता है और भगवान शिव २.३४ में हमेशा पूजा शिवलोक में रहता है।
12.)घुमेश्वर मंदिर
अंतिम सूची में राजस्थान के राज्य में स्थित घुमेश्व मंदिर आता है। यह मंदिर अपने नाम अनंत काल तक शिव पुराण में उल्लेख किया है। यह प्रसिद्ध रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित है। मंदिर बहुत सुंदर है शानदार देवगिरि पर्वत से युक्त है। मंदिर स्थित है आकर्षक एल्लोरा गुफाओं के पास। भगवान शिव से जगह के आसपास घूमने के लिए इस्तेमाल किया उनके अनुयायियों की बीमारी का इलाज करने के लिए जगह के लिए। आज हम शिवलिंग के कई मात्रा है लेकिन सबसे शुभ लोगों ज्योतिर्लिंग कहा जाता हैं।
Source: https://bit.ly/2rY56Bi
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