Showing posts with label ram sita. Show all posts
Showing posts with label ram sita. Show all posts

Friday, January 4, 2019

भगवान राम के जीवन से जुड़े 2 प्रेरक प्रसंग |



अपने पिता महाराज दशरथ की आज्ञा पाकर श्रीराम सीता मैया और लक्षमण जी के साथ 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए अयोध्या से प्रस्थान कर गए. इसके बाद वे प्रयाग (इलाहाबाद), चित्रकूट, पंचवटी ( नासिक ), दण्डकारण्य, लेपक्षी, किश्किन्दा, रामेश्वरम, आदि स्थानों पर रहे और इस दौरान उनके साथ कई प्रसंग घटे.

प्रसंग #1 –  शूर्पणखा की नाक काटना


जब भगवान् राम पंचवटी में रह रहे थे तभी एक दिन रावण की बहन शूर्पणखा एक सुंदरी का रूप धारण कर उनके पास आई और उनके दिव्य स्वरुप से मोहित हो कर उनसे विवाह करने के लिए कहने लगी.
इस पर श्रीराम ने अपनी पतिव्रता पत्नी सीता के बारे में बताया और कहा कि वह उनके अनुज लक्ष्मण के पास जाए.
जब शूर्पणखा ने लक्षमण जी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा तो वह बोले, ” हे सुंदरी! मैं तो भगवान् राम का दास हूँ यदि तुमने मुझसे विवाह किया तो तुम्हे भी उनकी दासी बनना पड़ेगा. और यह तो तुम्हारे सम्मान के विरुद्ध होगा. तुम राम भैया के पास जाओ वही सबके स्वामी हैं वही सबकुछ करने में समर्थ हैं.
यह सुनकर शूर्पणखा क्रोध से लाल हो गयी और रामजी से बोली, “शायद तुम्हे मेरी असीम शक्ति का ज्ञान नहीं है, जो तुम मेरे निवेदन को ठुकरा कर मेरा उपहास कर रहे हो.”
और ऐसा कह कर वह अपने असली रूप में आ गयी और सीता मैया को खाने के लिए दौड़ी.
यह देख श्री राम ने लक्षमण को उसे दण्डित करने का संकेत दे दिए और लक्षमण जी ने अपनी तलवार से उसके नाक-कान काट दिए.

प्रसंग #2 – खर-दूषण से युद्ध


नाक-कान कटने के बाद शूर्पणखा खून से लथपथ अपने भाइयों खर-दूषण के पास दौड़ी गयी और खर से बोली, “भाई! धिक्कार है तुम्हारे बल और पराक्रम पर. आज तुम्हारे राज्य में साधारण मनुष्यों की हिम्मत इतनी बढ़ गयी है कि उन्होंने मेरा ये हाल करने का दुःसाहस कर दिया है.”
और शूर्पणखा ने अपने साथ घटी घटना बता दी.
यह सुन कर खर क्रोधित हो उठा और तत्काल अपने भाई दूषण और 14 हज़ार राक्षसों की सेना लेकर राम-लक्षमण पर आक्रमण करने के लिए निकल पड़ा. उसकी इस विशाल सेना में एक से बढ़ कर एक पराक्रमी व दिव्यास्त्रों से सुसज्जित राक्षस मौजूद थे.
उनके आने का कोलाहल सुनकर श्रीराम ने लक्षमण जी से सीता मैया को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने को कहा और स्वयं अपना धनुष और अक्षयबाण वाले दो तरकस बाँध कर तैयार हो गए.
जल्द ही राक्षस वहां आ पहुंचे और नाना प्रकार के अश्त्रों-शश्त्रों से उन पर वार करने लगे. पर श्रीराम ने एक-एक कर के उनके सारे अश्त्र -शश्त्र काट डाले और सहस्त्रों बाणों से खर-दूषण समेत समस्त राक्षसों का संहार कर दिया.
इस प्रकार रघुवंशियों में श्रेष्ठ श्रीराम ने आधे पहर में ही इतनी विशाल और सूरवीरों से भरी सेना को अकेले ही समाप्त कर दिया|
यदि आप और पढ़ना चाहते है तो पढ़िए हमारी वेबसाइट पर : www.radhemaa.com
For Educational and Medical Help, we are a Helping hand... Please visit our website on www.radhemaa.com
                                                                                                                             Source: https://bit.ly/2F9oELF

Saturday, June 9, 2018

राम जी के लिए क्यों चीरा हनुमान जी ने अपना सीना ||

राम जी के लिए क्यों चीरा हनुमान जी ने अपना सीना  ||


जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अपनी पत्नी सीता और भैया लक्ष्मण के साथ चौदह वर्षों के वनवास और रावण के साथ हुए युद्ध के पश्चात् अयोध्या वापस लौटे तब इस उपलक्ष में पूरे अयोध्या में हर्षो उल्लाहस था और सभी लोग खुशियां मना रहे थे। कुछ दिनों पश्चात श्री राम अपने भाइयों एवं पत्नी सीता के साथ राज सभा में थे और सभी को युद्ध में उनके सहयोग के लिए प्यार स्वरुप उपहार दे रहे थे तब माता सीता ने हनुमान को अपने गले से उतार कर बहुत हे कीमती मोतियों का हार दिया और उनकी वीरता सहस और राम भक्ति की सराहना की, हनुमान जी उपहार ले कर कुछ आश्चर्य में थे और उन्होंने माला तोड़ दी और एक एक मोती अपने दांतो से चबा कर उसमे कुछ देखते और उसे फेंक देते,

हनुमान जी को ऐसा करते देख पूरी सभा हैरान थी और माता सीता भी क्रोधित थी की उनके दिए हुए उपहार का इतना अपमान, परंतु भगवान् सही राम इस सब को देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। उनके इस व्यवहार को देख कर सभा में उपस्थित कुछ लोगो ने हमुमान जी को उपहार के इस अपमान का कारण पुछा तब श्री हनुमान जी ने बड़ी विनम्रता से का की में तो इन कीमती मोतियों में अपने प्रभु श्री राम और माता सीता को ढूंढ रहा हूँ, परंतु मुझे अभी तक किसी भी मोती में प्रभु राम और माता सीता के दर्शन नहीं हुए इसलिए ये मोती मेरे लिए बेकार हैं क्यू की जिस वस्तु में मेरे राम नहीं वो मेरे लिए व्यर्थ है। हनुमान जी की इस बात पर पूरी सभा में हलचल होने लगी कुछ हँसने लगे कुछ व्यंग करने लगे कुछ ने तो यहाँ तक कह दिया इस का अर्थ ये हुआ की प्रभु श्री राम और सीता आपके रोम रोम में वास होना चाहिए यदि नहीं है तो आपका ये शरीर भी व्यर्थ है।

ऐसा सुन कर हनुमान जी महाराज ने भरी सभा के सामने अपना सीना चीर के अपने हृदय में विराजित प्रभु राम और माता सीता के दर्शन समस्त सभा को कराये. और ये दृश्य देख कर समस्त सभा जन राम भक्त हनुमान जी की जय जय कार करने लगे।

Sunday, January 12, 2014

African Hindus of Cape Coast enact Ramleela on 31 December




Hinduism is the fastest spreading religion in Ghana under the leadership of Swami Ghananda Saraswati who is a monk of the Shankarachrya order, and is an African like most Hindus of Ghana. 

The Hindus are mostly converts from Christianity who have embraced Sanatana Dharma on their own without any active effort on part of the Swami or his followers! 

May Shri Sita- Rama and Lord Hanuman protect and shower their blessings on Ghanian Hindu devotees!!! 


Click here to watch video of Ghanian Hindus performing pujas, havans and aartis at their temples in Africa http://www.youtube.com/watch?v=2Zq-3A4xnxs. To watch a video of Ramleela performed on December 31, 2013 click here https://www.facebook.com/photo.php?v=10152136536498728  




Note - 

To know more about Guru Maa’s teachings you may follow her on her account on Twitter and Facebook or log on to www.radhemaa.com. These social pages are handled by her devoted sevadars. To experience her divine grace, Bhakti Sandhyas and Shri Radhe Guru Maa Ji’s darshans are conducted every 15 days at Shri Radhe Maa Bhavan in Borivali, Mumbai. The darshans are free and open to everyone.

One may also volunteer to Mamtamai Shri Radhe Guru Maa’s ongoing social initiatives that include book donation drives, blood donation drives, heart checkup campaigns and financial support for various surgical procedures. Contact Shri Radhe Maa’s sevadar on +91 98200 82849 or email on admin@radhemaa.com to participate in these charitable activities.

(Picture Courtesy - Google.com)

To get latest updates about 'Shri Radhe Guru Maa' visit -