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Friday, February 1, 2019

जानिये भगवान हनुमान के जन्‍म का रहस्‍य |


भगवान हनुमान के जन्‍म की कथा, माता अंजना से जुड़ी हुई है। भगवान हनुमान माता अंजना और केसरी नन्‍दन के पुत्र थे, जो अंजनागिरि पर्वत के थे। पहले अंजना, भगवान ब्रह्मा के कोर्ट में एक अप्‍सरा थी, उसे एक ऋषि ने शाप देकर बंदरिया बना दिया। अपने बचपन में अंजना ने एक बंदर को पैरों पर खड़े होकर ध्‍यान लगाते देखा, तो उसने उस बंदर को फल फेंक कर मार दिया। वह बंदर एक ऋषि में बदल गया और उसकी तपस्‍या भंग होने पर वह क्रोधित हो गया। उसने अंजना को शाप दिया कि जिस दिन उसे किसी से प्रेम हो जाएगा, उसी क्षण वह बंदरिया बन जाएगी।

अंजना ने बहुत माफी मांगी और ऋषि से उसे क्षमा करने को कहा। पर ऋषि ने एक नहीं सुनी और अंजना को शाप देकर कहा कि वह प्रेम में पड़ने के बाद बंदरिया बन जाएगी लेकिन उसका पुत्र भगवान शिव का रूप होगा।

कुछ समय बाद, अंजना जंगलों में रहने लगी। वहां उसकी भेंट केसरी से हुई, जिससे प्रेम होने पर वह बंदरिया बन गई और केसरी ने अपना परिचय देते हुए अंजना को बताया कि वह बंदरों का राजा है। अंजना ने गौर से देखा तो पाया कि केसरी के पास ऐसा मुख था जिसे वह मानव से बंदर या बंदर से मानव कर सकता था। केसरी की ओर से प्रस्‍ताव रखने पर अंजना मान गई और दोनों का विवाह हो गया। अंजना ने घोर तपस्‍या की और भगवान शिव से उनके समान एक पुत्र मांगा। भगवान ने तथास्‍तु कहा।

वहीं दूसरी ओर, अयोध्‍या के राजा दशरथ ने पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रकामेस्‍थी यज्ञ आयोजित किया। अग्नि देव को प्रसन्‍न करने के बाद उन्‍होने दैवीय गुणों वाले पुत्रों की कामना की। अग्निदेवता ने प्रसन्‍न होकर दशरथ को एक पवित्र हलवा दिया, जिसे तीनों पत्नियों में बांटने को कहा। राजा ने बड़ी रानी तक हलवे को पंतग से पहुंचाया, वहीं बीच में कहीं माता अंजना प्रार्थना कर रही थी, हवन की कटोरी में वह हलुवा जा गिरा, माता अंजना ने उस हलवे को ग्रहण कर लिया। उसे खाने के बाद उन्‍हे लगा जैसे गर्भ में भगवान शिव का वास हो गया हो।

इसके पश्‍चात उन्‍होने हनुमान जी को जन्‍म दिया। भगवान हनुमान को वायुपुत्र इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि हवा चलने के कारण ही वह हलुवा, माता अंजनी की कटोरी में आकर गिरा था। भगवान हनुमान के जन्‍म लेते ही माता अंजना अपने शाप से मुक्‍त होकर वापस स्‍वर्ग चली गई। भगवान हनुमान सात चिरंजीवियों में से एक हैं और भगवान श्रीराम के भक्‍त थे। रामायण की गाथा में उनका स्‍थान हम सभी को पता है।

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Thursday, January 24, 2019

हनुमान पौराणिक कथा ।


श्रीरामचरित मानस लिखने के दौरान तुलसीदासजी ने लिखा- सिय राम मय सब जग जानी;
करहु प्रणाम जोरी जुग पानी!

अर्थात 'सब में राम हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए।'

यह लिखने के उपरांत तुलसीदासजी जब अपने गांव की तरफ जा रहे थे तो किसी बच्चे ने आवाज दी- 'महात्माजी, उधर से मत जाओ। बैल गुस्से में है और आपने लाल वस्त्र भी पहन रखा है।'

तुलसीदासजी ने विचार किया कि हूं, कल का बच्चा हमें उपदेश दे रहा है। अभी तो लिखा था कि सब में राम हैं। मैं उस बैल को प्रणाम करूंगा और चला जाऊंगा।
पर जैसे ही वे आगे बढ़े, बैल ने उन्हें मारा और वे गिर पड़े। किसी तरह से वे वापस वहां जा पहुंचे, जहां श्रीरामचरित मानस लिख रहे थे। सीधे चौपाई पकड़ी और जैसे ही उसे फाड़ने जा रहे थे कि श्री हनुमानजी ने प्रकट होकर कहा- तुलसीदासजी, ये क्या कर रहे हो?

तुलसीदासजी ने क्रोधपूर्वक कहा, यह चौपाई गलत है और उन्होंने सारा वृत्तांत कह सुनाया।

हनुमानजी ने मुस्कराकर कहा- चौपाई तो एकदम सही है। आपने बैल में तो भगवान को देखा, पर बच्चे में क्यों नहीं? आखिर उसमें भी तो भगवान थे। वे तो आपको रोक रहे थे, पर आप ही नहीं माने।
तुलसीदास जी को एक बार और चित्रकूट पर श्रीराम ने दर्शन दिए थे तब तोता बन कर हनुमान जी ने दोहा पढ़ा था:

चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़, तुलसी दास चंदन घीसे तिलक करें रघुबीर।

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                                                                                                                                                                                       Source:https://bit.ly/2R8Y4nq

Wednesday, April 13, 2016

Jai Mata Anajana! Jai Anjani Putra


Anjana, the mother of Lord Hanuman is worshipped by several families in Himachal pradesh. 

There is a Mata Anjana temple in the Dharamsala district in Himachal Pradesh. 

It is believed that Mata Anjana can cure people of scorpion bites and several people who are bitten by scorpions are brought to the temple and cured.

May Mata Anajani, the mother of Lord Hanuman bless us all with stength! 

Jai Maa! Jai Guru Maa! 


Note
1.To know more about Guru Maa’s teachings you may follow her on her account on Twitter and Facebook or log on to www.radhemaa.com.

2.These social pages are handled by her devoted sevadars.

3.To experience her divine grace, Bhakti Sandhyas and Shri Radhe Guru Maa Ji’s darshans are conducted every 15 days in Mumbai.

4.The darshans are free and open to everyone.

5.One may also volunteer to Mamtamai Shri Radhe Guru Maa’s ongoing social initiatives that include book donation drives, blood donation drives, heart checkup campaigns and financial support for various surgical procedures.

6.To participate in these charitable activities contact Shri Radhe Maa’s sevadar - admin@radhemaa.com
(Photo Courtesy – google)

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