Friday, January 11, 2019

कैसे बाल मारुती का नाम हनुमान रख दिया गया |

                                 जानिये कैसे बाल मारुती का नाम हनुमान रख दिया गया |


दोस्तों श्री हनुमान जी की माता अंजनी और केसरी के पुत्र थे। कथा के अनुसार, अंजनी और केसरी को विवाह के बहुत समय बाद तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी। तब दोनों पति-पत्नी ने मिलकर पवन देव की तपस्या की थी। पवन देव जी के आशीर्वाद से श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जी बचपन से ही बहुत अधिक ताकतवर नटखट और विशाल शरीर वाले थे। हनुमान जी के बचपन का नाम मारुती था। एक बार मारुती  ने सूर्य देवता को फल समझकर उन्हें खाने के लिए सूर्यदेव के आगे बढ़े,और उनके पास पहुंचकर सूर्यदेव को निगलने के लिए अपना मुंह बड़ा कर लिया। इंद्रदेव ने मारुती को ऐसा करते देखा तो इंद्रदेव ने मारुती पर अपने बज्र से प्रहार कर दिया। इंद्र देव का बज्र मारुती की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगी। इंद्र देव का बज्र नन्हे मारुती  को लगते ही मारुती  बेहोश हो गए। यह देख उनके पालक पिता पवनदेव को बहुत ही गुस्सा आ गया। पवन देव अपने पुत्र मारुती  की हालत देखकर इतने गुस्से में आ गए कि उन्होंने सारे संसार में पवन का बहना रोक दिया। प्राण वायु के बिना सारे पृथ्वी लोक के वासी त्राहि-त्राहि करने लगे। यह सब देख कर इंद्रदेव ने पवनदेव को तुरंत मनाया। और मारुती  को पहले जैसा कर दिया।  सभी देवताओं ने नन्हे मारुती  को बहुत सारी शक्तियां प्रदान की। सूर्य देव के तेज अंश प्रदान करने के कारण ही श्री हनुमान जी का बुद्धि संपन्न हुआ। इंद्रदेव का बज्र मारुती  के हनु पर लगा था जिसके कारण ही नन्हे मारुती  का नाम हनुमान  हुआ।

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                                                                                                                             Source:https://bit.ly/2FtRSEc

जानिये लोहरी क्यों मनायी जाती है ।


लोहड़ी का त्योहार 13 जनवरी जो यानी कि मकर संक्रांति से दो दिन पहले मनाया जाएगा. यह त्योहार पंजाबियों का है. पंजाबी लोहड़ी से ही नए साल की शुरुआत मानते हैं. इस दिन फसल की कटाई कर ताजे गेहूं की रोटियां बनाई जाती हैं और ताजा गुड़ बनाया जाता है |

मान्यता है कि लोहड़ी के त्योहार के साथ ही शीत ऋतु ख़त्म होती है और बसंत का आगमन होता है |

बसंत के आगमन के साथ ही पेड़-पौधों में नई पत्तियां और फूल आते हैं. इस दिन महिलाएं और पुरुष नगाड़े की धुन पर पंजाब का पारंपरिक नृत्य भांगड़ा करते हैं |

लोग लोहड़ी जलाकर इसमें गन्ने तिल और गुड़ की आहुति देते हैं. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से सौभाग्य आता है |

लोहड़ी के दिन पंजाबी लोग अग्नि देवता को नई फसल भी भोग के तौर पर अर्पित करती हैं. साथ ही उनसे विनती करते हैं कि सालभर उनके खेतों की पैदावार अच्छी हो और घर में धन-धान्य की कोई कमी न हो | 

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                                                                                                                             Source: https://bit.ly/2RqaLPO 

जानिए कहां से आया श‌िव के पास व‌िषधर नाग

श‌िव के गले में व‌िषधर नाग कहां से आया 

भगवान श‌िव के साथ हमेशा नाग होता है। इस नाग का नाम है वासुकी। इस नाग के बारे में पुराणों में बताया गया है क‌ि यह नागों के राजा हैं और नागलोक पर इनका शासन है। सागर मंथन के समय इन्होंने रस्सी का काम क‌िया था ज‌िससे सागर को मथा गया था। कहते हैं क‌ि वासुकी नाग श‌िव के परम भक्त थे। इनकी भक्त‌ि से प्रसन्न होकर श‌िव जी ने इन्हें नागलोक का राजा बना द‌िया और साथ ही अपने गले में आभूषण की भांत‌ि ल‌िपटे रहने का वरदान द‌िया।

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Wednesday, January 9, 2019

श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कहानी |


एक बार की बात है देवराज इंद्र ब्रज के लोगों से बहुत क्रोधित हुए क्योंकि लोग भगवान कृष्ण की बातों को सुनकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे थे और इंद्र देव की पूजा नहीं कर रहे थे। क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें दंडित करने के लिए घनघोर वर्षा करने के लिए बादलों को भेजा जिसके कारण पूरे वृंदावन में बाढ़ की संभावना उत्पन्न हो जाए। आदेश देते हैं वृंदावन के ऊपर काले मेघों ने अत्यधिक वर्षा करना शुरू कर दिया। अत्यधिक वर्षा और बाढ़ के कारण ज्यादातर लोगों के घर पानी में बह गए।


वृंदावन के लोग डर गए और सभी भगवान कृष्ण की शरण में पहुंचे। भगवान कृष्ण को इस परिस्थिति के बारे में सब कुछ ज्ञात हो चुका था। उसी समय कृष्ण ने पूरे गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ की छोटी उंगली पर एक छतरी की भांति उठा दिया। वृंदावन के सभी लोग और गाय एक-एक करके गोवर्धन पर्वत के नीचे आने लगे और इस प्रकार कृष्ण ने वृंदावन के लोगों की जान बचाई। कृष्ण के इस आलोकित चमत्कार को देखकर सभी वृंदावन के लोग आश्चर्यचकित रह गए। भगवान कृष्ण की शक्ति को देख कर बादल वापस लौट गए और व्रज वासी ख़ुशी से रहने लगे।

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                                                                                                                         Source: https://bit.ly/2QA01Ja

Every Winter Shri Radhe Maa Chritable Trust Runs Blanket Donation campaign

Every Winter Shri Radhe Maa Chritable Trust runs Blanket Donation campaign, wherein Radhe Maa provides fine warm blankets to the underprivileged people residing on the open streets. Shri Radhe Maa Chritable Trust attempt  to reach out to humans all over in Mumbai.

Radhe Maa believes that there is no better present than offering warm clothing to the needy people in winter season. Lakhs of homeless experience bitterness of cold every year, however at the equal time it has given us an opportunity to serve humanity via donating blankets to the needy.

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Radhe Maa Offers Blankets to Old Citizens In Winter 


Radhe Maa

Radhe Maa Donating Blankets to Needy People 


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Radhe Maa Serving Blankets to people on Mumbai streets


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Radhe Maa Donating Blankets to Needy People 


Radhe Maa

Radhe Maa Serving Blankets to people on Mumbai streets


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Radhe Maa Serving Blankets to people on Mumbai streets


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Radhe Maa Donating Blankets to Needy People 


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Radhe Maa Serving Blankets to people on Mumbai streets


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Radhe Maa urges devotees to engage with society through initiatives like donation of blood, clothes, food, books and medicines to orphanages, old age homes and sadhus.
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Tuesday, January 8, 2019

Radhe Maa | Dabang Dunia Musical Charity Night | Latest News, Images

Glimpse Of Radhe Maa from Dabang Dunia Musical Charity Night

Radhe Maa

Shri Radhe Maa Charitable Trust Donates 3 laks 51 Thousand for SPM TRUST


Radhe Maa with Ustad Ghulam Mustafa

Dr. Kishore Wadhwani honoured Ustad Ghulam Mustafa Khan


Radhe Maa with Ustad Ghulam Mustafa Son
Ustad Ghulam Mustafa Khan Son With Radhe Maa

Radhe Maa

Radhe Maa

Radhe Maa


Radhe Maa



Radhe Maa With Kishore Wadhwani

Radhe Maa With Devotees

Radhe Maa giving blessings to her devotees


Radhe Maa With Devotees

Radhe Maa With Devotees

Radhe Maa giving blessings to her devotees


Radhe Maa With Devotee

Radhe Maa giving blessings to her devotees


Radhe Maa With Devotees
Radhe Maa with her devotees

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Monday, January 7, 2019

श्री गणेशजी की कहानी ।


                                                           श्री गणेशजी की कहानी ।

एक दिन पारवती माता स्नान करने के लिए गयी लेकिन वहां पर कोई भी रक्षक नहीं था। इसलिए उन्होंने चंदन के पेस्ट से एक लड़के को अवतार दिया और उसका नाम रखा गणेश। माता पारवती नें गणेश से आदेश दिया की उनकी अनुमति के बिना किसी को भी घर के अंदर ना आने दिया जाये।
जब शिव जी वापस लौटे तो उन्होंने देखा की द्वार पर एक एक बालक खड़ा है। जब वे अन्दर जाने लगे तो उस बालक नें उन्हें रोक लिया और नहीं जाने दिया। यह देख शिवजी क्रोधित हुए और अपने सवारी बैल नंदी को उस बालक से युद्ध करने को कहाँ। पर युद्ध में उस छोटे बालक नें नंदी को हरा दिया। यह देख कर भगवान शिव जी नें क्रोधित हो कर उस बाल गणेश के सर को काट दिया।
अब माता पारवती वापस लौटी तो वो बहुत दुखी हुई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। शिवजी को जब पता चला की वह उनका स्वयं का पुत्र था तो उन्हें भी अपनी गलती का एहसास हुआ। शिवजी नें पारवती को बहुत समझाने का कोशिश किया पर वह नहीं मानी और गणेश का नाम लेते लेते और दुखित होने लगी।
अंत में माता पारवती नें क्रोधित हो कर शिवजी को अपनी शक्ति से गणेश को दोबारा जीवित करने के लिए कहा। शिवजी बोले – हे पारवती में गणेश को जीवित तो कर सकता हूँ पर किसी भी अन्य जीवित प्राणी के सीर को जोड़ने पर ही। माता पारवती रोते-रोते बोल उठी – मुझे अपना पुत्र किसी भी हाल में जीवित चाहिए।
यह सुनते ही शिवजी नें नंदी को आदेश दिया – जाओ नंदी इस संसार में जिस किसी भी जीवित प्राणी का सीर तुमको मिले काट लाना। जब नंदी सीर खोज रहा था तो सबसे पहले उससे एक हाथी दिखा तो वो उसका सीर काट कर ले आया। भगवान शिव नें उस सीर को गणेश के शारीर से जोड़ दिया और गणेश को जीवन दान दे दिया। शिवजी नें इसीलिए गणेश जी का नाम गणपति रखा और बाकि सभी देवताओं नें उन्हें वरदान दिया की इस दुनिया में जो भी कुछ नया कार्य करेगा पहले !जय श्री गणेश को याद करेगा ||
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                                                                                                                             Source:https://bit.ly/2SI72cT