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Wednesday, January 16, 2019

साई बाबा की ३ चमत्कारी कहानियाँ ।


  कहानी | १ |

साईं बाबा रोज़ मंदिर और मस्जिद में दिया जलाते थे, पर इसके लिये उन्हें बनियों से तेल मांगने की जरुरत होती थी पर एक दिन बनियों ने बाबा से कह दिया बाबा हमारे पास तेल नहीं है। तब बाबा वहां से चुपचाप चले गये और मंदिर जाकर उन्होंने दिये में तेल की जगह पानी डाला और दिया जल पड़ा और यह बात चरों तरफ फ़ैल गई। तब वहां के बनिये उनके सामने आये और उनसे मांफी मांगी तो बाबा ने उन्हें माफ़ कर दिया और उनसे कहा अब कभी झूठ मत बोलना ।

कहानी ।२।
एकबार बाबा का भक्त बहुत दूर से अपनी पत्नी को लेकर बाबा के दर्शन के लिये आया और जब वह जाने लगा तो जोरों से बारिश होने लगी तब उनका भक्त परेशान होने लगा तब बाबा ने उनकी परेशानी को देखकर कहा – हे अल्लाह बारिश को रोक दो मेरे बच्चों को घर जाना है और तत्काल ही बारिश रुक गई।

कहानी ।३।
एकबार गाँव के एक व्यक्ति की एक बेटी अचानक खेलते हुये वहां के कुएं में गिर गई लोगों को लगा वह डूब रही है सब वहां दौड़कर गये और देखा की वह लटकी है कोई अदृश्य है जो उसे पकडे हुये है। वह और कोई नहीं बाबा ही थे क्योंकि वह बच्ची कहती थी कि मै बाबा की बहन हूँ। अब लोगों को कोई ओर स्पष्टीकरण की ज़रूरत नहीं थी।   

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                                                                                                                                                         Source: https://bit.ly/2RTOSro



Thursday, September 13, 2018

साईं बाबा से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियां !



साईं बाबा के चमत्कारिक कहानियों के पीछे जीवन से जुड़ी कोई न कोई शिक्षा या मर्म छिपा है। साईं बाबा सशरीर भले ही अब नहीं हैं लेकिन सच्चे भक्तों को हमेशा यह एहसास होता है कि साईं बाबा उनके साथ हैं। उनकी जन्म तिथि के विषय में यह मान्यता है कि एक बार अपने एक भक्त के पूछे जाने पर उन्होंने अपनी जन्म तिथि 28 सितंबर 1836 बताई थी। इसलिए हर 28 सितम्बर को उनका जन्मदिन मनाया जाता है। इस मौके पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियों पर एक नजर।

भोजन में सभी प्राणियों का हिस्सा

शिरडी के लोग शुरू में साईं बाबा को पागल समझते थे लेकिन धीरे-धीरे उनकी शक्ति और गुणों को जानने के बाद भक्तों की संख्या बढ़ती गयी। साईं बाबा शिरडी के केवल पांच परिवारों से रोज दिन में दो बार भिक्षा मांगते थे।

वे टीन के बर्तन में तरल पदार्थ और कंधे पर टंगे हुए कपड़े की झोली में रोटी और ठोस पदार्थ इकट्ठा किया करते थे। सभी सामग्रियों को वे द्वारिका माई लाकर मिट्टी के बड़े बर्तन में मिलाकर रख देते थे। कुत्ते, बिल्लियाँ, चिड़िया निःसंकोच आकर उस खाने का कुछ अंश खा लेते थे, बची हुए भिक्षा को साईं बाबा भक्तों के साथ मिल बाँट कर खाते थे।

कुत्ते काअनादर  नहीं साईं का

एक बार साईं के एक भक्त ने साईं बाबा को भोजन के लिए घर पर बुलाया। निश्चित समय से पूर्व ही साईं बाबा कुत्ते का रूप धारण करके भक्त के घर पहुंच गये। साईं के भक्त ने अनजाने में चूल्हे में जलती हुई लकड़ी से कुत्ते को मारकर भगा दिया।

जब साईं बाबा नहीं आए तो उनका भक्त घर पर जा पहुंचा। साईं बाबा मुस्कुराये और कहा, "मैं तो तुम्हारे घर भोजन के लिए आया था लेकिन तुमने जलती हुई लकड़ी से मारकर मुझे भगा दिया।" साईं का भक्त अपनी भूल पर पछताने लगा और माफी मांगी। साईं बाबा ने स्नेह पूर्वक उसकी भूल को क्षमा कर दिया।

उदी की महिमा से संतान सुख

लक्ष्मी नामक एक स्त्री संतान सुख के लिए तरप रही थी। एक दिन साईं बाबा के पास अपनी विनती लेकर पहुंच गयी। साईं ने उसे उदी यानी भभूत दिया और कहा आधा तुम खा लेना और आधा अपने पति को दे देना।

लक्ष्मी ने ऐसा ही किया। निश्चित समय पर लक्ष्मी गर्भवती हुई। साईं के इस चमत्कार से वह साईं की भक्त बन गयी और जहां भी जाती साईं बाबा के गुणगाती। साईं के किसी विरोधी ने लक्ष्मी के गर्भ को नष्ट करने के लिए धोखे से गर्भ नष्ट करने की दवाई दे दी। इससे लक्ष्मी को पेट में दर्द एवं रक्तस्राव होने लगा। लक्ष्मी साईं के पास पहुंचकर साईं से विनती करने लगी।

साईं बाबा ने लक्ष्मी को उदी खाने के लिए दिया। उदी खाते ही लक्ष्मी का रक्तस्राव रूक गया और लक्ष्मी को सही समय पर संतान सुख प्राप्त हुआ।

Source - https://bit.ly/2MuaxzF

Wednesday, December 13, 2017

श्री साईं बाबा व्रत कथा और पूजन विधि


साईंबाबा के पूजन के लिए सभी दिनों में  गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता हैं. साईं व्रत कोई भी कर सकतें हैं चाहे बच्चा हो या बुजुर्ग या महिला .ये व्रत कोई भी जाती-पति के भेद भावः बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है.शिर्डी साईं बाबा  वैसे भी हम सभी जानते हैं कि साईं बाबा जात-पात को नहीं मानते थे और उनका कहना था कि इश्वर  तो एक ही  है. सबका मालिक एक.

ये व्रत कोई भी गुरूवार को साईं बाबा का नाम ले कर शुरू किया जा सकता. सुबह या शाम को साईं बाबा के फोटो की पूजा करना किसी आसन पर पीला या लाल कपडा बिछा कर उस पर साईं बाबा का फोटो रख कर स्वच्छ पानी से पोछ कर चंदन या कुमकुम  का तिलक लगाना चाहिये और उन पर पीला फूल या हार चढाना चाहिये अगरबत्ती और दीपक जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिये और साईं बाबा का स्मरण करना चाहिये और प्रसाद बाटना चाहिये प्रसाद में कोई भी फलाहार या मिठाई बाटी जा सकती है. अगर सं भव हो तो साईं बाबा के मंदिर में जाकर भक्तिभाव से बाबा के दर्शन करना चाहिए, और बाबा साईं के भजनों में भक्तिमय रहना चाहिए.

शिरडी के साई बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन और सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए. इसके साथ ही साई बाबा की कृ्पा का प्रचार करने के लिये 7, 11, 21 साई पुस्तकें या साईं सत्चरित्र , अपने आस-पास के लोगों में बांटनी चाहिए. इस प्रकार इस व्रत को समाप्त किया जाता है. इसे उददापन के नाम से भी जाना जाता है.

source:-http://www.saibabashirditemple.in/hindi/hindi-fast-sai-baba.php

Thursday, September 3, 2015

Shirdi Sai Baba in Dwarakamai

Sai Baba came to Shirdi and stayed at Dwarkamai many years in his life till the end. In Dwarkamai he solved many problems of the people. He cured the worries of the people and he cured all the diseases of the people.