Wednesday, May 4, 2011

'Maa Bhagwati Jagran and Param Shradhey Shri Radhe Maaji's Divya Darshan











Date - 7th May, 2011
Time  - 8 pm

Address - 
129, Ranjit Enclave, Urban Estate, Phanse 2, Near Dulhan Palace, Jalandhar

Contact – 
Vipin Malhotra – 9779912200 / 9872678675 |Talli Babaji – 09820969020 | Raji Massi - 9876405171

Tuesday, May 3, 2011

Param Shradhey Shri Radhe Maa - Dubai Chowki

 प्रभु या उनकी दिव्य शक्ति को कोई बाँध नहीं सका है, और जब जब भक्तों ने आर्त पुकार की है, अपने भक्तो की लाज और भक्ति का मान रखने हेतु अवश्य ही किसी न किसी रूप में पधारे ही हैं,क्यूँ की हम भक्तों के लिए ममतामयी श्री राधे माँजी भगवान स्वरूप हैं, इसलिए हम भी ऐसा ही मानते हैं की जब जब हमारे दिल से सच्ची अरदास निकलती है ,श्री राधे माँ उसे ज़रूर पूरा करती हैं |
 
एक माह लन्दन के भक्तो की पुकार सुनने के पश्चात जब करुणामयी श्री राधे माँ जी दुबई पहुंची तो दुबई एअरपोर्ट पर भक्तों का तांता लगा हुआ था और भक्तों की आँखें मानो बस देवी माँ जी की ही प्रतीक्षा में बिना पलक झपकाए बैठी थी,दुबई स्तिथ श्री राधे माँ जी के भक्तों ने सहृदय और भावपूर्ण स्वागत किया और जुमेर बाच रेसोर्ट स्तिथ ओएसिस अपार्टमेन्ट की सैन्तालिस्वी मंजिल पर देवी माँ जी के विराजमान होने का सुन्दर प्रबंध किया था|
ऊपर दिए गए विडियो क्लिप में आप जो देवी माँ जी के दिव्य दर्शन कर रहे हैं, यह कृपा श्री राधे माँ जी ने उनकी भक्त रिया और निर्मल सागर के घर पे बरसाई थी,जो के शारजाह में रहते हैं,करीब चार साल से अरदास कर रहे इस परिवार की मनोकामना देवी माँ जी ने इनके घर चरण कमल पधार कर पूरी की,एनी कई भक्तों ने श्री राधे माँ जी की कृपा प्रसाद के आनंद संग दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और खुद को धन्य किया|

Saturday, April 23, 2011

Mamtamai Shri Radhe Maa






" गुरुर  ब्रम्हा  गुरुर  विष्णु 
  गुरुर  देवो  महेश्वरः
  गुरुर  साक्षात्  परब्रम्हा
  तस्मै  श्री  गुरवे  नमः ”

इस पावन श्लोक को हम अपने जीवन में अनगिनत बार पढ़ भी चुके हैं और सुन भी चुके हैं,परन्तु क्या हमने इसके अर्थ या उसके अर्थ की गहराई में कभी जाने की चेष्टा की? अधितम लोगों का उत्तर ना ही होगा, "गुरु" मात्र शब्द ही नहीं बल्कि इसमें पूरा ब्रह्माण्ड समाया हुआ है,"गुरु" शब्द दो अक्षरों को मिला कर अपना आस्तित्व पाता है, "गु" और "रु" , "गु" का अर्थ है अन्धकार और "रु" का सामान्य अर्थ है मुक्ति दिलाने वाला,तो "गुरु" का भावार्थ हुआ अन्धकार दूर करना वाला, अब यदि इसपे भी विशेष रौशनी डाली जाए तो उपरोक्त श्लोक का भावार्थ समझना होगा, जो की इस प्रकार है :- 
गुरु श्रृष्टि रचयिता श्री ब्रह्मा जी के सामान है जो अपने छात्रों में एक सुन्दर चरित्र का निर्माण करता है, गुरु श्रृष्टि के पालनकर्ता विष्णु जी के समान है जो उस सुन्दर चरित्र की रक्षा करता है और गुरु संहारकर्ता शिवजी के सामान है जो बुरी आदतों और बुरे चरित्र का संहार करता है !

 प्रभु श्री राम जी के गुरु वशिष्ठ , श्री कृष्ण जी के गुरु संदीपनी जी ने भी उनके जीवन में मत्वपूर्ण योगदान किया है , इसलिए हिन्दू शास्त्रों में गुरु की सेवा परम सेवा बतायी गयी है! शिष्य का परम कर्तव्य है की अपने गुरु द्वारा बताये सत्मार्ग पर चले और सदा उनके चरणों में अपनी सेवा देता रहे ! ममतामयी श्री राधे माँ जी के आदरणीय गुरु श्री श्री १००८ महंत राम दीन दास जी महराज ने भी श्री राधे माँ की दिव्य शक्तियों को जाना परखा और उन्हें और भी ज्यादा प्रभावित करने में मदद की ,दिनचर्या में कठिन जप तप आदि उनका नित्कर्म हुआ करता था!

गुरु शिष्य परंपरा और गुरु सेवा की एक जीती जागती मिसाल हैं ममतामयी श्री राधे माँ, उन्होंने सदा अपने आदरणीय गुरु जी का विधिवत्त आदर सम्मान किया तथा विश्वभर में उनके नाम का प्रचार भी किया है,श्री राधे माँ जी विशेष तौर पर मात्र गुरु जी के लिए ही पंजाब भ्रमण करती रही हैं, करुणामयी श्री राधे माँ जी की अंतर्मन से इच्छा थी की उनके गुरु जी हवाई जहाज़ का सफ़र करें और विदेश भ्रमण भी करें और उन्होंने अपनी इन इच्छाओं को पूर्ण भी किया, हर कार्य निज हाथों से सम्पूर्ण कर नाम सदा गुरु जी का ही सबके समक्ष रखा! 



ममतामयी श्री राधे माँ के पावन सानिध्य में लगातार पिछले ८ वर्षों से चैत्र की राम नवमी के दिवस भव्य और दिव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया जाता है,और महत्वपूर्ण बात ये है की श्री राधे माँ जी का स्वयं का भवन होते हुए भी, यह भव्य शोभायात्रा आज भी आदरणीय गुरु जी के आश्रम "डेरा परमहंस बाग़ " से ही प्रारंभ की जाती है तथा यात्रा का अंत भी डेरा परमहंस बाग़ पर ही होता है, श्री राधे माँ जी के आदरणीय गुरु श्री श्री १००८ महंत श्री राम दीन दास जी वर्ष २००९ में करीब १५१ वर्ष की आयु में उनका पावन पुण्य शारीर शांत हुआ और आत्मा पंचतत्व में विलीन हो गयी , गुरु जी के परलोक गमन पश्चात श्री राधे माँ जी ने आदरणीय गुरु जी के आदर,सम्मान एवं स्मृति में एक भव्य मंदिर का निर्माण भी किया है,जबकि उनका स्वयं का भवन,गुरूजी के आश्रम से छोटा ही है!

मैं (मनमोहन गुप्ता) अपने आपको बड़ा भाग्यशाली और धन्य महसूस करता हूँ ,की ऐसे महापुरुष की परम शिष्या और हमारी ममतामयी श्री राधे माँ जी ने हमारे घर परिवेश को पिछले कुछ वर्षों से अपना धाम बना लिया है, सही मायनों में तो हमे उनकी शरण में आने के बाद ही,भक्ति,श्रद्धा, प्रभु ध्यान ,गुरुसेवा का परमार्थ समझ आया है,  मैंने और मेरे परिवार ने पिछले कुछ वर्षों में ये  परम अनुभव किया है की यदि आप तन और मन से गुरु सेवा करें तो आपकी हर मनचाही मुराद पूरी होती है!

Wednesday, April 20, 2011

Mamatamai Shri Radhe Maa


दिनांक १८ अप्रैल २०११ को हर साल की तरह इस साल भी अपने भक्तों की विशेष बिनती पर ममतामयी श्री राधे माँ ने पठानकोट के निकट स्तिथ सिद्ध काठगढ़ महादेव जी के दर्शन कियेl



देवी माँ जी के साथ मुकेरियां के कई भक्तों को भी इस अनूठे शिवलिंग के दिव्य दर्शनों का लाभ मिला, जो की प्राचीन काल से दो शिलाओं में विभाजित है, पौराणिक कथाओं के अनुसार बड़ी शिला को शिव जी और छोटी शिला को पार्वती जी माना गया है और यह दोनों शिलाएं समय समय पर जुडती  और अलग होती रहती हैंl

स्थानीय लोगों ने भी जब करुणामयी श्री राधे माँ के दर्शन किये तो वो भी अपने को धन्य धन्य मानने लगे!

 
मिक्की सिंग और उनके साथी कलाकारों ने रल मिल के शेरांवाली माँ और शिव भोले बाबा का सुन्दर मनमोहक गुणगान किया और शिव भोला समिति द्वारा लंगर की सुंदर व्यवस्था भी की गयीl



पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में प्रभुत्ता को लेकर द्वन्द हुआ और इस युद्ध को रोकने हेतु शिव जी ने मध्यस्तता की और एक अग्नि स्तम्भ का रूप ले दोनों के मध्य विराजमान हो गए, कहते हैं काठगढ़ महादेव की दोनों शिलाओं में से बड़ी वाली शिला वही अग्नि स्तम्भ है!